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ट्रेन में अब सिल्वर फॉयल या थर्मोकोल की प्लेट में नहीं मिलेगा खाना, सफर से पहले जान लें जरूरी बात

Thu, 07 Jun 2018 09:53 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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ट्रेनों में परोसे जाने वाला खाना अब ना ही पर्यावरण के लिए और ना ही सेहत के लिए हानिकारक होगा। रेलवे ने निर्णय लिया है कि अल्यूमिनियम फॉयल, पॉलीमर व थार्मोकॉल की जगह अब गन्ने के छिलके से तैयार होने वाली थाली में खाना परोसेगा। इको फ्रेंडली सुगर बगास नाम की थाली को राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेन के यात्रियों के लिए उपलब्ध कराया गया है। 

 
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विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर रेलवे ने इको फ्रेंडली थाली में खाना देना शुरू कर दिया है। बतौर पॉयलट प्रोजेक्ट नई दिल्ली से संचालित होने वाली सियालदाह राजधानी, हावड़ा राजधानी, मुंबई राजधानी, अहमदाबाद राजधानी, मुंबई स्पेशल ट्रेन के साथ ही भोपाल शताब्दी, देहरादून शताब्दी, अमृतसर शताब्दी और लखनऊ शताब्दी ट्रेन में शुरू किया गया है। 

 
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इंडियन रेलवे टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) के अधिकारियों के अनुसार योजना सफल रही तो सभी ट्रेनों में सुगर बगास प्लेट का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए यात्रियों से फीडबैक भी लिया जाएगा। प्लेट के साथ दिए जाने वाले चम्मच भी गन्ने के छिलके से ही तैयार किया गया है जो पर्यावरण के लिए काफी बेहतर है। यह प्लेट सिल्वर फॉयल वाले प्लेट से महंगा है। 

 
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डेमो - फोटो : डेमो
सिल्वर फॉयल प्लेट की कीमत जहां दो रुपये प्रति प्लेट थी वहीं बगास की प्लेट तैयार करने में 5 रुपया 60 पैसा लग रहा है। हालांकि फिल्हाल रेलवे ने इस प्लेट में खाना परोसने के लिए यात्रियों से अधिक कीमत नहीं वसूल रहा है। अगर ऐसा हुआ तो आपका रेल सफर महंगा हो सकता है। प्लेट एक डिब्बे के रूप में डिजाइन किया गया है जिसमें ढकने के लिए कवर भी है। प्लेट व थालियों को एक बार इस्तेमाल करने पर इसे फेंकने पर स्वत:खाद के रूप में परिवर्तित हो जाएगा। इस थाली में दाल, चावल, सब्जी रखने के लिए खांचे बने हुए है।  

 
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