कहा जाता है कि शादी सात जन्मों का बंधन है, लेकिन समय के साथ-साथ आ रहे बदलाव ने इसे फिजूलखर्ची और दिखावे का मंच बना दिया है। आजकल लोग दिखावे के चलते शादी में लाखों-करोड़ों रुपये तक भी खर्च कर देते हैं। अपनी सालों की जोड़ी कमाई को एक झटके में पानी की तरह बहा देते हैं, लेकिन सवाल यह है कि दो लोगों को मिलाने के लिए ये फिजूलखर्ची क्यों की जाती है?
ऐसे लोगों के लिए उत्तराखंड का जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर ने इस रिवाज को तोड़ते हुए मिसाल कायम की है।
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marriage
उत्तराखंड का जनजातीय क्षेत्र में लोग शादी में दिखावे के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची को सामाजिक बुराई माना जाता है। दहेज और शादी में होने वाली फिजूलखर्ची को रोकना यहां की संस्कृति है। आम तौर पर दुल्हे राजा बारात लेकर दुल्हन के घर जाते हैं। लेकिन यहां एक ऐसी शादी होने जा रही है, जहां तीन दुल्हन एक साथ बारात लेकर दुल्हे राजा के घर जाएंगी। जौनसार-बावर के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में दूल्हे के घर दुल्हन बरात लेकर जाने की परंपरा है।
जनजातीय परपंरा के अनुसार देहरादून जिले के इस ग्रामीण इलाकों में आज भी दुल्हन गाजे-बाजों के साथ दूल्हे के घर बरात लेकर पहुंचती है। इसी परपंरा को कायम रखते हुए अटाल के प्रधान ने अपने तीन भाइयों का विवाह जौनसारी रिवाज से एक ही दिन कराने का फैसला किया है। विवाह समारोह आगामी छह मार्च को आयोजित किया गया है। जिसकी तैयारी में ग्रामीण अभी से जुट गए हैं। इस दिन तीन दुल्हन एक साथ बरात लेकर प्रधान के घर पहुंचेंगी। इस शादी समारोह में करीब दो हजार लोग शामिल होंगे।