दिमागी रूप से लोगों के साथ दुनिया कैसा सुलूक करती है, बताने की जरूरत नहीं। देखिए पागलखाने के अंदर दिमागी रूप से विक्षिप्त कैसे रहते हैं।
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पासूंग एक इंडोनेशियाई शब्द है। इसका मतलब होता है वो लोग जो विक्षिप्त हों या जिनको नीची निगाहों से देखा जाता है। लेकिन इस शब्द को 1977 में बैन कर दिया गया।
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न्यूयॉर्क के एक फोटोग्राफर एंड्रीआ स्टार रीज ने इंडोनेशिया में मेंटल हेल्थ से जुड़ी सुविधाओं पर एक प्रोजेक्ट बना रही थीं।
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उन्होंने अपनी इस डॉक्यूमेंट्री का नाम दिया डिस्ऑर्डर। उन्होंने बताया कि पागलखानों के भीतर के हालात देखने लायक नहीं होते।
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ऐसा नहीं है कि पागलखानों को रन करने वाले लोग इसे ठीक रखने की कोशिश नहीं करते। पर, फिर भी किसी आम आदमी के लिए इस माहौल को देखना काफी अलग अहसास होता है।
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छोटे से लेकर बड़ी उम्र, हर तरह के लोग इसके अंदर देखने को मिलते हैं। किसी को अलग तरह का कमरा नहीं दिया जाता। बल्कि सभी लोगों को एक पिंजड़े सी चीज में डाल दिया जाता है। ये काफी बड़ी जगह होती है जिसके अंदर ये लोग रहते हैं। वहीं औरतों के लिए बनाई गई जगह को मर्दों वाले कंपार्टमेंट से लोहे की एक दीवार से अलग बनाया गया है।
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mentally ill in indonesia
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कुछ पागलखानों में ऐसे लोगों को ठीक करने के लिए एक खास ढंग की हीलिंग भी दी जाती है। जैसे कि किसी तरह का हर्बल ड्रिंक पिलाना, प्रार्थना करवाना, उल्टियां करवाना और अन्य तरीके अपनाना।
ऐन नाम की इस महिला को तब से एक बंद कमरे में बंद कर दिया जब वो मात्र दस साल की थी। जिस कमरे में उन्होंने बंद किया गया उसमें एक खिड़की भी नहीं थी। अब हालत ये है कि वो खड़ी भी नहीं हो पाती। पहले वो दौड़ भी लेती थी। खाने की कमी भी इन जगहों पर देखी जा सकती है। वहीं कपड़ों की कमी, एक्सरसाइज ना करवाना और सामान्य जिंदगी से भी दूर रखा जाना आम है।