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इंडोनेशिया के पागलखानों के अंदर का नजारा

Wed, 09 Mar 2016 11:13 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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- फोटो : boredpanda
दिमागी रूप से लोगों के साथ दुनिया कैसा सुलूक करती है, बताने की जरूरत नहीं। देखिए पागलखाने के अंदर दिमागी रूप से विक्षिप्त कैसे रहते हैं।
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- फोटो : boredpanda
पासूंग एक इंडोनेशियाई शब्द है। इसका मतलब होता है वो लोग जो विक्षिप्त हों या जिनको नीची निगाहों से देखा जाता है। लेकिन इस शब्द को 1977 में बैन कर दिया गया।
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- फोटो : boredpanda

न्यूयॉर्क के एक फोटोग्राफर एंड्रीआ स्टार रीज ने इंडोनेशिया में मेंटल हेल्‍थ से जुड़ी सुविधाओं पर एक प्रोजेक्ट बना रही थीं।

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- फोटो : boredpanda
उन्होंने अपनी इस डॉक्यूमेंट्री का नाम दिया डिस्‍ऑर्डर। उन्होंने बताया कि पागलखानों के भीतर के हालात देखने लायक नहीं होते।
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- फोटो : boredpanda
ऐसा नहीं है कि पागलखानों को रन करने वाले लोग इसे ठीक रखने की कोशिश नहीं करते। पर, फिर भी किसी आम आदमी के लिए इस माहौल को देखना काफी अलग अहसास होता है।
 
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- फोटो : boredpanda
छोटे से लेकर बड़ी उम्र, हर तरह के लोग इसके अंदर देखने को मिलते हैं। किसी को अलग तरह का कमरा नहीं दिया जाता। बल्कि सभी लोगों को एक पिंजड़े सी चीज में डाल दिया जाता है। ये काफी बड़ी जगह होती है जिसके अंदर ये लोग रहते हैं। वहीं औरतों के लिए बनाई गई जगह को मर्दों वाले कंपार्टमेंट से लोहे की एक दीवार से अलग बनाया गया है।
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mentally ill in indonesia - फोटो : boredpanda
कुछ पागलखानों में ऐसे लोगों को ठीक करने के लिए एक खास ढंग की हीलिंग भी दी जाती है। जैसे कि किसी तरह का हर्बल ड्रिंक पिलाना, प्रार्थना करवाना, उल्टियां करवाना और अन्य तरीके अपनाना।
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- फोटो : boredpanda
ऐन नाम की इस महिला को तब से एक बंद कमरे में बंद कर दिया जब वो मात्र दस साल की थी। जिस कमरे में उन्होंने बंद किया गया उसमें एक खिड़की भी नहीं थी। अब हालत ये है कि वो खड़ी भी नहीं हो पाती। पहले वो दौड़ भी लेती थी। खाने की कमी भी इन जगहों पर देखी जा सकती है। वहीं कपड़ों की कमी, एक्सरसाइज ना करवाना और सामान्य जिंदगी से भी दूर रखा जाना आम है।
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