वर्ल्ड स्नेक डे के मौके पर मिलिए एक ऐसे शख्स से, जिसकी जिंदगी एक सांप ने बदल दी और वह बन गया 'स्नैकमैन'। अब जहरीले सांप उसके साथ दोस्त बनकर खेलते हैं। जानिए इनके बारे में सब कुछ।
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सतीश्ा कुमार, स्नैक मैन
- फोटो :
ये हैं, हरियाणा में करनाल जिले के गांव फफड़ाना के रहने वाले सतीश कुमार। इनकी जिंदगी एक सांप ने पूरी तरह से बदल कर रख दी। दरअसल, सतीश जब सातवीं कक्षा में था तो उसे सांप ने काट लिया था। इलाज से सतीश की जान तो बच गई, लेकिन तब से उसके मन में सांपों को जानने की इच्छा बढ़ी।
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स्नैकमैन सतीश कुमार
इच्छानुसार सतीश ने सांपों से संबंधित किताबें पढ़ीं, विशेषज्ञों से मिले और सांपों को पकड़ना शुरू कर दिया। सतीश सांप पकड़ने और उनसे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए स्नेक पार्क चेन्नई में प्रशिक्षण ले चुके हैं। इसके साथ ही सतीन ने पुणे, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी सांपों के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लिया है।
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स्नैकमैन सतीश कुमार
अब लोग सतीश को स्नेकमैन कहने लगे हैं। सतीश 1998 से लेकर अब तक हरियाणा में पाई जाने वाली सभी प्रजातियां के सांपों समेत हजारों सांप पकड़ चुका है। बकौल सतीश वह प्रदेशभर में सांप पकड़ने के लिए जाता है और सांप पकड़ने के बाद वाइल्डलाइफ अधिकारियों की सहायता से उन्हें जंगल में छोड़ देता है।
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स्नैकमैन सतीश कुमार
लोगों तक पहुंचने के लिए सतीश ने रोचक तरीका अपनाया। उसने करनाल और पानीपत में हर नाई की दुकान पर अपना मोबाइल नंबर लिखकर पोस्टर लगा रखा है। कोई भी उसे फोन कर उसकी सेवाए मुफ्त में ले सकता है। पिछले साल स्नैकमैन सतीश को सांप पकड़ने के लिए स्पेशल ग्लव्स भी दिए गए हैं।
सतीश के मुताबिक, उसने सांप पकड़ने के लिए पुणे से विशेष ट्रेनिंग भी ली है। अमेरिका से सांप पकड़ने के लिए विशेष दस्ताने भी मंगवाए हुए हैं। सतीश अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व राजस्थान में यह सेवा कार्य कर चुका है।