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दूल्हे को शराब पिलाकर यहां होती है शादी, खुद सास बनाती है जाम

Wed, 08 Nov 2017 10:04 AM IST
amarujala.com- Presented by: राजेश सैनी
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अगर आपको बताया जाए कि भारत में ऐसे इलाके भी हैं, जहां शादी के दिन दूल्हे को उसकी सास अपने हाथों से शराब पिलाती है। इससे भी ज्यादा हैरानी तो इस बात पर होती है कि यदि ऐसा न हो तो यहां विवाह सम्पन्न नहीं समझा जाता। चौंक गए ना... 


 
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चौंकना लाजिमी है। दरअसल, शराब पीना हमारे सभ्य समाज में गलत समझा जाता है। इसलिए कोई मां-बाप ये नहीं चाहेगा कि उनकी बिटिया किसी ऐसे घर में ब्याही जाए जहां दुल्हा शराब पीता हो।   

लेकिन यहां तो शादी की रस्म की शुरुआत ही शराब से होती है। जब तलक सास अपने हाथों से दूल्हे का जाम तैयार करके न दे और दूल्हा उसे पी न ले तब तक शादी अधूरी समझो। ये अनूठी परम्परा छत्तीसगढ के कवर्धा जिले में प्रचलित है। यहां बैगा-आदिवासियों में ऐसे ही शादियां होती हैं। 

 
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दूल्हे को दुल्हन की मां शराब पिलाकर रस्म की शुरुआत करती है और फिर पूरा परिवार शराब पीता है। और तो और दूल्हा और दुल्हन भी एक-दूसरे को शराब पिलाकर इस परंपरा को निभाते हैं।

इस समुदाय में शादी-ब्याह में ही नहीं बल्की मातम में भी शराब का सेवन किया जाता है। जिले के सुदूर वनांचल में निवासरत बैगा-आदिवासी परिवार में अब शादी का सिलसिला शुरू हो जाएगा।


 

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शादी का इन परिवारों को बेसब्री से इंतजार होता है। शादी में बाराती और घराती तो शराब पीते ही हैं। साथ ही दूल्हा-दुल्हन को भी शराब का शगुन करना बेहद जरूरी होता है। बारात जब दुल्हन लेने गांव पहुंचती है तो सबसे पहले शराब का ही शगुन किया जाता है।

एक चौंकाने वाला सच ये भी है कि जहां शादी को पंडित ही सम्पन्न करा सकता है यहां बिना पंडित ही शादी हो जाती है। दरअसल, बैगा आदिवासियों की शादी में कोई पंडित नहीं होता और न ही कोई विशेष सजावट होती है। सबसे अच्छी और सबसे खास बात ये है कि यहां दहेज प्रथा भी पूरी तरह से बंद है। यहां चलती है तो केवल महुए से बनी शराब। 

 
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परिवार का मुखिया शादी का खर्च महज 22 रुपये ही लेता है। वहीं समाज के पंचों को 100 रुपए दिए जाते हैं। वनांचल में निवासरत बैगा शादी रचाने और दुल्हन लाने के लिए आज भी पूरी बारात मीलों दूर पैदल चलकर जाती है।

शादी का पंडाल सिर्फ पेड़ों की पत्तियों से बनाया जाता है। तमाम रस्मों को पूरा करने के बाद दूल्हा दौड़ लगाकर दुल्हन को पकड़ लेता है। और फिर उसे अपनी अंगूठी पहना देता है बैगा इस प्रचलित मान्यता को लेकर चर्चा में रहते हैं।
 
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