इस लिस्ट में सबसे पहले नाम आता है कंबोडिया में रहने वाले छोटे से बच्चे ओर्न संबत का। ओर्न कोमरियम नाम के अजगर का ब्रेस्ट फ्रेंड है। ये अजगर 16 फीट लंबा है और ओर्न के साथ उनके घर पर ही रहता है। वो ओर्न के साथ तब से है जब वो सिर्फ तीन महीने का था।
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ये कहानी है एक ऐसी पेंग्विन की जो उसकी जान बचाने वाले शख्स से मिलने हर साल पांच हजार मील की दूरी तय करके तैरकर पहुंचती है। जाओ परीरा के लिए ये पेंग्विन उसके बच्चे की तरह है। हर साल जाओ भी इस पेंग्विन का इंतजार ब्राजील के एक बीच पर करते हैं।
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ऐसे कई लोग होते हैं जिन्हें छत या समुद्र के किनारे या फिर सड़कों पर जानवरों को कुछ ना कुछ खिलाते रहने का शौक होता है। आठ साल की बच्ची गाबी मन्न वॉशिंगटन में रहती है और हर दिन कौओें को कुछ ना कुछ खिलाती हैं। इसके बदले में ये कौवें उसके लिए हर दिन कोई ना कोई चीज गिफ्ट में लाते हैं। फिर चाहे वो कोई बटन हो या फिर प्लास्टिक का टुकड़ा, हर दिन वो भी अपने मुंह में कुछ ना कुछ दबाए पहुंचते हैं और उसे गाबी को दे जाते हैं।
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1969 में जॉन रेंडल और ऐस बर्ग ने एक शेर के बच्चे की जान बचाई थी। इन दोनों ने इस शेर के बच्चे को अपने लंदन वाले घर में रखा और पाला। जब उन्हें लगा कि अब उसे जंगलों में छोड़ देना चाहिए, तो वो उसे अफ्रीका के जंगलों में छोड़ आए। कई सालों बाद इन दोनों दोस्तों को लगा कि उन्हें उस शेर के बच्चे से जाकर मिलना चाहिए जो अब तक बड़ा हो गया होगा। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि जैसे ही वो जंगल पहुंचे, उस शेर ने उन्हें पहचान लिया और फिर ऐसे मिला जैसे कई सालों से रोज मिलता है।
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जानवरों की मदद कीजिए और बहुत संभावनाएं हैं कि वो आपको भूलेंगे नहीं। जी हां, ये भी एक ऐसा ही मामला है जहां एक ब्रिटिश पर्यवक्षक डामियन एसपिलन गोरिल्ला को बचाने और उन्हें जंगलों में छोड़कर लाने का काम करते हैं। पांच साल पहले उन्होंने एक गुरिल्ला को बचाकर जंगल में छोड़ा था। 2014 में उन्होंने गेबन के एक जंगल रिजर्व में जाकर उसी गुरिल्ला से मिलने की सोची। उन्हें हैरत हुई इस बात पर कि जब वो वहां गए तब वो गुरिल्ला खुद ही उनके पास आया और गले लगाकर उनकी गोद में ऐसे बैठा जैसे रोज ही बैठता रहा हो।
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कई बार जानवर भी लोगों की जान बचाने का काम कर जाते हैं। पांच साल पहले तक एरिक ओग्रे का वजन काफी बढ़ गया था। उन्हें ब्लड प्रेशर के साथ टाइप-टू डाइबिटीज की भी शिकायत हुई। इसके बाद उन्हें डॉक्टरों ने बताया कि अगर वो बहुत दवाइयों का सहारा नहीं लेना चाहते हैं, तो एक कुत्ते को पाल लें। उसके साथ खूब घूमें और रहें। उन्होंने पीटी नाम के एक कुत्ते को गोद ले ही लिया। इसके बाद एरिक ने कुत्ते की देखभाल करते हुए खुद को बदल लिया। उसे घुमाते हुए वो खुद पतले हुए और लोगों से मोटापे के कारण मिलने से कतराते थे, जो अब सोशल हो गए। उन्हें फिट करने के बाद एक दिन पीटी नहीं रहा। एरिक का आज भी लगता है कि वो उसे सिर्फ बदलने के लिए आया था।
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पांच साल की का काइली ब्रॉउन को लगता है कि वो एक बत्तख की मां है। वो उसे अपने साथ रखती है और रोज ही उसे तालाब में भी ले जाती हे।
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आइरिस नाम की ये बच्ची ऑटिस्टिक है। उसे अपना दोस्त थुला नाम की इस बिल्ली में मिली। दोनों एक-दूसरे के ब्रेस्ट फ्रेंड्स हैं। जब दोनों साथ में होते हैं तो उन्हें और किसी की कोई जरूरत नहीं होती।
रैंबो नाम का ये छोटा सा मगरमच्छ साइन लैंग्वेज पहचानता है। पर एक समय बाद वो इतना बड़ा हो गया कि उसे घर में पालने की इजाजत इनके देश की सरकार नहीं देती। जन्म से ग्यारह साल तक पालने के बाद रैंबो मैरी थॉर्न के लिए उनके परिवार का हिस्सा बन गया था।