फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

22 साल के इस लड़के ने तीन महीने की छोटी सी बच्ची के लिए किया ऐसा काम, आपकी आंखें भी नम हो जाएंगी...

Mon, 06 Aug 2018 09:56 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
guy and girl
खून के रिश्ता इस दुनिया में सारे रिश्तों से बढ़कर समझा जाता है। शायद इसीलिए माता-पिता के लिए उनकी औलाद अहम होती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे खून के रिश्ते के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी दास्तान सुनकर आपको भी हैरानी होगी। वैसे आज की दुनिया ऐसे लोग भी रहते हैं कई बार यकीन के परे हो जाता है।     
विज्ञापन

2 of 6
blood
दरअसल ये एक ऐसे खून के रिश्ते की कहानी है जो दो अजनबियों के बीच पिछले तीन साल से चला आ रहा है। जैसे-जैसे दिन बीतते गए ये रिश्ता और भी प्रगाढ़ होता चला गया। इस कहानी में दो मुख्य पात्र हैं। 22 साल का युवा यश रावल और 11 साल की बच्ची सिमर खंज। 

 
विज्ञापन

3 of 6
blood
जितनी अनूठी दोनों की दोस्ती है उतनी ही अनूठी है इसकी शुरुआत है। सिमर उस वक्त महज तीन महीने की थी जब उसके माता-पिता गुरप्रीत और गुरबीर कौर खंज को पता चला कि उनकी बेटी थैलेसीमिया रोग है। ऐसे रोगियों की जान बचाने के लिए हर महीने में उन्हें ब्लड की जरूरत पड़ती है। ऐसे में थैलेसीमिया रोगियों की जान बचा पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।  

 

4 of 6
blood bank
लेकिन सिमर की जिंदगी में वरदान बनकर आए यश रावल जो लगभग तीन साल पहले सिमर के पिता प्रो. गुरबीर से मिले थे। उनकी मुलाकात एक ब्लड कैंप के दौरान हुई थी। 19 साल के यश रावल का ब्लड ग्रुप सिमर से मिलता था। जब यश को उस नन्ही जान के रोग के बारे में पता चला तो उसने मानव धर्म निभाने का फैसला कर लिया और हर तीन महीने में ब्लड अरेंज करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। पिछले तीन सालों से ये सिलसिला बदस्तूर जारी है। 

 
विज्ञापन

5 of 6
blood donation
खास बात ये है कि यश निस्वार्थ भाव से ये काम कर रहे हैं। वो कहता है कि ये रिश्ता अनूठा है। ब्लड डोनेट करते समय कई बार सिमर से मुलाकात होती है। वो थैंक्स कह के मुस्कुरा देती है और मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी सफल हो गई क्योंकि ये किसी मासूम के काम आ रही है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
blood bank
मां गुरबीर बताती हैं कि हम लोग हर दो-तीन महीने में ब्लड की जरूरत को लेकर बेहद परेशान रहते थे लेकिन यश ने हमारी मुश्किलें काफी हद तक आसान कर दी हैं। उसे सिमर में एक बहन, एक नन्हीं दोस्त नजर आई और उसी समय उसने कह दिया कि इसके लिए ब्लड अरेंज करने की जिम्मेदारी मेरी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें