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जानिए, जांबाज आंचल धरा ने कैसे तय किया मुंबई से गोवा का पैदल सफर

Wed, 09 Mar 2016 11:13 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : the audacious project
अधिकतर लोगों को सफर करने के नाम भर से ही थकान होने लगती हैं। जबकि उन्हें गाड़ी, ट्रेन या हवाई जहाज में ही बैठ के जाना होता है। ऐसे में इस महिला ने जो कर दिखाया है, वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। जान कर हैरानी होगी लेकिन ये महिला मुंबई से गोवा तक पैदल चल कर गई।
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मुंबई से गोवा तक चल कर गई ये महिला

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- फोटो : the audacious project
ये हैं आंचल धरा जो पेशे से फोटोग्राफर हैं और इरादों से बहुत मजबूत। आंचल ने अपने पति प्रशांत के साथ मिलकर द ऑडैसिटी प्रोजेक्ट नाम का एक प्रोजेक्ट शुरू किया। इस प्रोजेक्ट का मकसद था जिंदगी बदल देने वाले अनुभवों को लोगों के सामने रखना। इन्हें पता था कि लोगों को इसके लिए प्रेरित करने के लिए पहले उन्हें खुद कुछ अलग करना होगा। तभी उन्होंने तय किया कि वो मुंबई से गोवा तक पैदल जाएंगे।
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इस प्रोजेक्ट को उन्होंने नाम दिया 'टू फीट एंड अ ड्रीम'। इन्होंने मुंबई के अंधेरी से गोवा के मोरजिम तक का 583 किलोमीटर का सफर 26 दिनों में पूरा किया। आंचल पिछले दो साल से ऐसा करना चाहती थीं। एक दिन उन्होंने अपने पति को अपनी ये इच्छा बताई और वे लग गए आंचल के लिए रूट प्लान बनाने में।

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- फोटो : the audacious project
आंचल ने खुद एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पति ने उनके इस सपने के बारे में कोई सवाल भी नहीं किया, बस उशे पूरा करने में जुट गए। मुंबई से गोवा तक का सफर सफल रहे इसके लिए इन्होंने पहले मुंबई से पुणे यानी 170 किमी पैदल चल कर टेस्ट भी किया। ये सफर 7 दिन में पूरा हुआ।
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आंचल को अंदाजा लग गया कि गोवा तक जाने के लिए उनको अपने शरीर को किस तरह तैयार करना होगा। इसलिए उन्होंने गोवा के लिए निकलने से छ: महीने पहले से ही ट्रेनिंग शुरू कर दी। वे हर दिन 10 किमी चलीं, और धीरे धीरे इसे 10 से 30किमी कर दिया।

 
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यानी लंबे वक्त तक हर दिन 30 किमी चल कर आंचल ने खुद को गोवा के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया। इतना ही नहीं वे हफ्ते में 2-3 बार जिम में भी खूब ट्रेनिंग करती थीं, औऱ फिर आ ही गया वो दिन जिसका आंचल को 2 साल से इंतजार था। लेकिन आंचल की मुश्किल बना गर्म मौसम। उन्होंने अक्टूबर में चलना शुरू किया था, जो काफी गर्म था। इसलिए गर्मी से बचने के लिए उन्होंने तय किया कि सुबह नाश्ते के बाद नहीं बल्कि शाम को 6 बजे के बाद चलना शुरू करेंगे। ताकि गर्मी से राहत मिले।
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वो दोपहर में ब्रेक लेती थी औऱ शाम में चलती थीं। आंचल के सपोर्ट के लिए उनकी एक टीम पीछे कार में चलती थी। लेकिन पैदल सिर्फ आंचल चलती थीं। वे सब सुबह 4:30 बजे उठते थे। आंचल हर 7 किमी पर 15 मिनट का ब्रेक लेती थीं। इस दौरान वे कार में बैठ कर आराम करती और पैरों की मालिश करती थीं। फिर जैसे ही दिन के आखिर में वे अपने होटल पहुंच कर अपने सूजे हुए पैरों की बर्फ से सिकाई करती थीं। छालों को ठी करती थीं और फिर 10:30 बजे तक सोती थीं।

 

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इस बीच उनके पति सारी तस्वीरों को सही से अरेंज करते और सोशल मीडिया पर हर दिन का अपडेट देते थे। आंचल की सपोर्ट टीम में उनके पति के अलावा उनके कैमरामैन रंजीत और कुछ दोस्त थे। आंचल बताती हैं कि जहां बारत में किसी महिला का अकेले सफर करना खतरनाक होता है, उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि उन्होंने कई लोगों से रास्ते भर बातचीत की। लोग भी उनके इरादों के बारे में जानकर हैरान रह जाते थे।

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उन्होंने बताया कि उन्हें एक ऐसा किसान मिला जिसके गन्ने के खेत थे। इस साल बारिश कम होने से वो परेशान था और चार एकड़ में से सिर्फ एक एकड़ भर के गन्ने उगे थे। फिर भी उसने आंचल का जज्बा देखते हुए उसे एक्स्ट्रा गिलास गन्ने का जूस दिया। आंचल बहुत खुश हैं कि इस दौरान उन्हें कई रोमांचक अनुभव हुए।

 

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कर्नाटक के बॉर्डर पर स्थित निपानी में आंचल ने अपनी जिंदगी का सबेस खूबसूरत सूर्यास्त देखा। उनकी ये तस्वीरें बखूबी बयां कर रही हैं। चूंकि वे खुद भी फोटोग्राफर हैं इसलिए वे मानती हैं कि प्रकृति ही हर तरह की कला की प्रेरणास्त्रोत है।

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जहां इतने अच्छे अनुभव हुए वहीं आंचल को कई परेशानियां भी हुईं। एक वक्त आया जब धरा के पैर जवाब दे चुके थे। उनके घुटने 12 दिन तक इतने दर्द हुए कि उन्हें नीकैप पहना पड़ा। इस बीच उनकी टीम के दो कैमरे भी बर्बाद हो गए। एक पेड़ से टकराकर टूट गया और दूसरा घने जंगल में खो गया।

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इस बीच आंचल को अपने माता-पिता की भी बहुत याद आई। वे बताती हैं कि उनके माता-पिता खुद भी बहुत चलते हैं और जब वे छोटी थीं, तो उन्हें भी चलवाते थे। वे चलते चलतचे अंताक्षरी खेला करती थीं। इस दौरान वो ऐसे कई लोगों से मिली जो उनकी की तरह किसी सपने को पूरा करने के लिए जी रहे थे। उन्होंने बताया कि वो एक गांव की महिला सरपंच से मिलीं जिन्होंने पूरी टीम को अपने घर आमंत्रित किया और सबने वहीं दिवाली मनाई।
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यकीनन आंचल का ये सफर बहुत अच्छा रहा। इतनी थकान के बाद भी जब वे गोवा पहुंची तो उन्हें कितना अच्छा लगा होगा इसका उत्साह तस्वीरों में देखा जा सकता है। आंचल का ये जज्बा साबित करता है कि महिलाएं भी चाहें तो क्या नहीं कर सकतीं। हर इंसान को अपने सपने पूरे करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। ऐसी महिलाएं सभी के लिए एक उदाहरण हैं।
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