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लड़की ने चेहरे पर ब्लड पोतकर फेसबुक पर डाली पोस्ट, वजह जानकर चौंक जाएंगे

Tue, 16 Jan 2018 06:44 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Yazmina Jade
भारतीय समाज में महिलाओं की माहवारी को लेकर कई तरह की अवधारणाएं हैं, लेकिन अब समाज में इसे लेकर कई सारी प्रगतिशील चर्चाएं होने लगी है। इसे अंग्रेजी में हम 'Menstrual Periods' भी कहते हैं।  

इस मुद्दे को समाज के सामने पेश करने के लिए ऑस्ट्रेलिया की एक स्पिरिट हीलर और फॉर्मर हेयरड्रेसर 26 वर्षीय याजमीना जेद ने एक अजीबों गरीब कदम उठाया जिसके बाद से वो एकाएक चर्चा में आ गई। 
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Yazmina Jade
दरअसल, इस लड़की ने अपने पीरियड्स के ब्लड को चेहरे पर लगाया ताकि लोग इसे हेय दृष्टि से न देखें। महिला ने फिर इसे अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्‍ट कर दिया फिर क्‍या था तमाम तरह के कमेंट भी आने लगे, जिसमें कई यूजर्स ने इस पोस्ट के लिए लिखा की ये लड़की मानसिक तौर पर बीमार है।

 
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Yazmina Jade
लेकिन याजमीना का कहना है कि वो ये काम अपनी बॉडी को रिकनेक्ट करने के लिए करती है, जिसे हम सामाजिक शर्मिंदगी के चलते नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा करके लोगों को दिखाना चाहती थी कि ये कोई शर्मिंदा होने वाली चीज नहीं है, बल्कि ये हमारी बॉडी का ही एक हिस्सा है। याजमीना का कहना है कि आज की मार्डन लाइफ में इसे लेकर शर्मिंदगी नहीं महसूस की जा सकती। फिर भी इससे जुड़े कई तरह के भ्रम को तवज्जो दी जाती है।

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Yazmina Jade
वह ये भी कहती हैं कि महिलाएं इसे सीक्रेट रखती हैं ऐसे में वो इसका ब्लड अपने चेहरे पर लगाकर महिलाओं को ये बताना चाहती हैं कि इसे चोरी-छिपे मैनेज करने की जरूरत नहीं है। इस वजह से उन्‍हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया जाने लगा। इतना ही नहीं इसके साथ ही यूजर्स ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताया और मेन्टल इंस्टीट्यूशन जाने की सलाह दे डाली।

लेकिन ये भी हकीकत है कि इस संबंध में सोशल मीडिया पर तमाम लोग अब खुलकर लिखने लगे हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष सभी इस मसले पर अब खुलकर बोल रहे हैं। ऐसी ही एक पोस्ट वीनित बिश्नोई नामक शख्स ने शेयर की है। इस पोस्ट में याजमीना के बारे में लिखा गया है।

 
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Yazmina Jade
यह कोई श्राप नहीं
बिश्नोई लिखते हैं यह कोई श्राप नहीं बल्कि महिलाओं की शारीरिक संरचना में प्राकृतिक परिवर्तन का हिस्‍सा है, जिसे वैज्ञानिक दृष्‍टिकोण से देखा जाए तो ये काफी सुलझी हुई प्रक्रिया है लेकिन वहीं जब इसे धार्मिक दृष्‍टिकोण से देखा जाता है तो ये एक तरह से कर्मकांड से जुड़ा एक बड़ा ही अजीबों गरीब मान्‍यताएं लेकर जन्‍म लेता है। हालांकि आज का आधुनिक समाज पुरुष तथा महिला में कोई फर्क नहीं करता। इस आधुनिक दौर में महिलाएं, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं।
 
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