सोमवंशी ने कहा- कूलर को लेकर दिक्कत ये भी है कि भारत में उन्हें लेकर कोई स्टार रेटिंग सिस्टम नहीं है, जैसा कि एसी या पंखों के मामले में होता है। भारत में काफी गर्मी पड़ती है, इसलिए यहां रहने वाले लोग उस गर्मी को झेलने की क्षमता भी रखते हैं। ऐसे में एसी को 18 या 20 पर चलाने को सामान्य जरूरत नहीं बताया जा सकता। उन्होंने कहा, यूरोप के कुछ देश ऐसे हैं, जहां अगर तापमान 28 डिग्री पार कर जाता है तो वहां कहा जाता है कि गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए जबकि भारत में 40 डिग्री तापमान भी सामान्य है। लेकिन क्या सिर्फ एसी या कूलर के दम पर गर्मी ने निपटा जा सकता है? जानकार बताते हैं कि भारत में बड़ी दिक्कत ये भी है कि इमारतों के बनने में लगने वाला सामान और उनका डिजाइन गर्मी बढ़ाने वाला है। सोमवंशी ने कहा, 'यहां ज्यादातर मकान कंक्रीट के बनते हैं। मकान करीब-करीब होते हैं क्योंकि आबादी का घनत्व ज्यादा है। इसके अलावा इमारत बनाते वक्त वेंटिलेशन का ध्यान भी नहीं दिया जाता। यही वजह है कि रात में भी मकान ठंडे नहीं होते।'