क्या आप जानती हैं कि आप जो भी खरीदारी करती हैं वह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका मूड कैसा है? और उसी के अनुसार आप पैसे भी खर्च करती हैं। हम आपको कुछ चीजें बता रहे हैं कि कैसे आपके मूड का संबंध आपके द्वारा की जाने वाली शॉपिंग और अन्य जगह पर खर्च किए जाने वाले पैसे से जुड़ा होता है।
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हैप्पी शॉपिंग
जब लोग खुश होते हैं, तब वह अपनी इस खुशी को लोगों के साथ साझा करते हैं। अपनी खुशी को साझा करने के दौरान वे खरीदारी करते हैं। प्रैक्सिस मीडिया ओपिनेस की फाउंडर और सीइओ साइमा गजियानी कहती हैं, 'जब मैं खुश होती हूं, तब शॉपिंग में मजा आता है। हालांकि इसमें मैं कोई जल्दबाजी नहीं दिखाती, बल्कि मैं आराम से शॉपिंग करती हूं और अन्य विकल्पों की तलाश करती हूं।'
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अमेरिका की शॉपिंग वेबसाइट ‘स्वैप डॉट कॉम’ द्वारा एक अध्ययन किया गया, जिसमें शामिल 70 प्रतिशत लोगों ने माना कि जब उन्होंने मूड खराब होने पर शॉपिंग की, तो उनका मूड वाकई में अच्छा हो गया। इसलिए जब लोग दुखी होते हैं, तब मन को खुश करने के लिए शॉपिंग करते हैं। शॉपिंग व्यक्ति की टेंशन को कम करती है। इससे व्यक्ति के अंदर फीलगुड हार्मोन्स एक्टिव होते हैं, जो उन्हें खुशी देते हैं।
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हैैप्पीनेस कोच अमीषा सेठी कहती हैं कि एक बार जब मैं अपने दोस्त के साथ शॉपिंग मॉल में थी, उस समय वह बहुत दुखी थी। मैंने उसे देखा कि उसने बहुत ज्यादा शॉपिंग की। मुझे नहीं पता कि यह सब लंबे तक उसके लिए कितना फायदेमंद था, लेकिन शॉपिंग के अंत में वह पहले कि अपेक्षा ज्यादा खुश थी।’
दरअसल, पसंदीदा सामान खरीदने के बाद लोगों को तनाव से मुक्ति मिलती है। पसंद की चीजें आंतरिक सुख का एहसास देती है। जब हम क्रोध में होते हैं, तब कुछ परिस्थितियों को नियंत्रित या प्राप्त करना चाहते हैं और आवेग में आकर बहुत ज्यादा शॉपिंग करके हमें कुछ अच्छा महसूस होता है।
करेंसी कार्ट डॉट कॉम की सह-संस्थापक निशीमा अग्रवाल कहती हैं, ' अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आत्म-नियंत्रण सबसे अच्छा तरीका है। जब हम भावनात्मक रूप से थोड़ा भावुक होते हैं, तब हमें अपने कदमों पर नियंत्रण रखना चाहिए। परेशानियों से भागने की बजाय उनका सामना करना सीखना चाहिए।'