हाथियों का इलाज
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बांग्लादेश के सीमावर्ती मेघालय में एक पागल हाथी को काबू करते समय डॉ.शर्मा की जान जोखिम में पड़ गई थी। वह बताते हैं, "पागल हाथियों के साथ काम करना बहुत जोखिम भरा होता है। कई बार सोचता हूं तो लगता है मैं जिंदा कैसे बच गया। मेघालय के जंगल में जिस पागल हाथी को पकड़ना था वो सामने से आक्रमण करने का प्रयास कर रहा था। स्थिति काफी भयानक थी। मुझे हाथी को बेहोश करने के लिए पूरी रात पेड़ पर गुजारनी पड़ी। दरअसल हाथी के शरीर में हार्मोन टेस्टोस्टेरोन बढ़ने की वजह से वह पागल हो जाता है। पागल हाथियों को पकड़ने के लिए हम सीरिंज में दवा डालकर उसे बंदूक से चलाते हैं। सीरिंज लगने के आधे घंटे के भीतर हाथी बेहोश हो जाता है। फिर हाथी के चारों पैर बांधकर जंगल में उसका इलाज करते हैं। अब तक इस तरह के 139 हाथियों का इलाज कर चुका हूं।"
केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के "प्रोजेक्ट हाथी" की एक संचालन समिति के सदस्य नियुक्त किए गए डॉ. शर्मा की बेटी भी अब इस काम में उनकी मदद कर रही है। डॉ. शर्मा कहते हैं, "मैं चाहता हूं कि मेरे बाद हाथियों के इलाज की जिम्मेदारी मेरी बेटी संभाले। वह मेरे साथ हाथियों का इलाज करने जंगल में जाती है। पशुचिकित्सा की पढ़ाई करने के बाद वह अब जंगली जानवरों में अल्ट्रासाउंड ग्राफ के उपयोग पर पीएचडी कर रही है।" भारत में हाथियों की आबादी की बात करें तो अगस्त 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हाथियों की कुल संख्या 27,312 दर्ज की गई थी। जबकि असम में 5,719 हाथी है।