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मूर्ति पर हैं असली बाल और निकलता है पसीना, वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य

Fri, 21 Nov 2025 05:56 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Tirupati Balaji Temple: भारत में कई बेहद चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर हैं। इन मंदिरों की चर्चा पूरी दुनिया में होती है। आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुपति बालाजी का मंदिर भी चमत्कारिक और रहस्यमयी माना जाता है।
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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य - फोटो : Adobe Stock
Tirupati Balaji Temple: भारत में कई बेहद चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर हैं। इन मंदिरों की चर्चा पूरी दुनिया में होती है। आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुपति बालाजी का मंदिर भी चमत्कारिक और रहस्यमयी माना जाता है। यह मंदिर भारतीय वास्तु कला और शिल्प कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। तिरुपति बालाजी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत पर स्थित है और यह भारत के मुख्य तीर्थ स्थलों में से एक है। 

तिरुपति बालाजी का वास्तविक नाम श्री वेंकटेश्वर स्वामी है जो स्वयं भगवान विष्णु हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान वेंकटेश्वर के सामने प्रार्थना करते हैं, उनकी सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के मुताबिक, यहां आकर तिरुपति मंदिर में अपने बाल दान करते हैं। इस अलौकिक और चमत्कारिक मंदिर से कई रहस्य जुड़े हुए हैं। आइए जानते हैं उन रहस्यों के बारे में...
 
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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य - फोटो : Adobe Stock
कहा जाता है कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर बाल लगे हैं जो असली हैं। यह बाल कभी भी उलझते नहीं हैं और हमेशा मुलायम रहते हैं। मान्यता है कि यहां भगवान खुद विराजमान हैं। जब मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करेंगे तो ऐसा लगेगा कि भगवान श्री वेंकेटेश्वर की मूर्ति गर्भ गृह के मध्य में है। लेकिन आप जैसे ही गर्भगृह के बाहर आएंगे तो चौंक जाएंगे, क्योंकि बाहर आकर ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान की प्रतिमा दाहिनी तरफ स्थित है। अब यह सिर्फ भ्रम है या कोई भगवान का चमत्कार इसका पता आज तक कोई नहीं लगा पाया है। 
 
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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य - फोटो : Adobe Stock
मान्यता है कि भगवान के इस रूप में मां लक्ष्मी भी समाहित हैं जिसकी वजह से श्री वेंकेटेश्वर स्वामी को स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र पहनाने की परम्परा है। तिरुपति बाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा अलौकिक है। यह विशेष पत्थर से बनी है। यह प्रतिमा इतनी जीवंत है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे भगवान विष्णु स्वयं यहां विराजमान हैं। भगवान की प्रतिमा को पसीना आता है, पसीने की बूंदें देखी जा सकती हैं। इसलिए मंदिर में तापमान कम रखा जाता है। 
 

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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य - फोटो : Adobe Stock
श्री वेंकेटेश्वर स्वामी के मंदिर से 23 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है जहां गांव वालों के अलावा कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। इस गांव में लोग बहुत ही अनुशासित हैं और नियमों का पालन कर जीवन व्यतीत करते हैं। मंदिर में चढ़ाया जाने वाला पदार्थ जैसे की फूल, फल, दही, घी, दूध, मक्खन आदि इसी गांव से आते हैं। गुरुवार को भगवान वेंकेटेश्वर को चंदन का लेप लगाया जाता है जिसके बाद अद्भुत रहस्य सामने आता है।

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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य - फोटो : Adobe Stock
भगवान का श्रृंगार हटाकर स्नान कराकर चंदन का लेप लगाया जाता है और जब इस लेप को हटाया जाता है तो भगवान वेंकेटेश्वर के हृदय में माता लक्ष्मी जी की आकृति दिखाई देती है। श्री वेंकेटेश्वर स्वामी मंदिर में एक दीया हमेशा जलता रहता है और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता। यहां तक कि यह भी पता नहीं है कि दीपक को सबसे पहले किसने और कब प्रज्वलित किया था।

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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य - फोटो : ANI
भगवान वेंकेटेश्वर की प्रतिमा पर पचाई कपूर लगाया जाता है। कहा जाता है कि यह कपूर किसी भी पत्थर पर लगाया जाता है तो पत्थर में कुछ समय में दरारें पड़ जाती हैं। लेकिन भगवान बालाजी की प्रतिमा पर पचाई कपूर का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 

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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े ये रहस्य - फोटो : Adobe Stock
मंदिर में मुख्य द्वार के दरवाजे पर दाईं तरफ एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे में मान्यता है कि बाल्यावस्था में इस छड़ी से ही भगवान वेंकेटेश्वर की पिटाई की गई थी जिसकी वजह से उनकी ठुड्डी पर चोट लग गई थी। तब से आज तक उनकी ठुड्डी पर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता है। ताकि उनका घाव भर जाए। भगवान वेंकेटेश्वर की मूर्ति पर कान लगाकर सुनें तो समुद्र की लहरों की ध्वनि सुनाई देती है। यह भी कहा जाता है कि भगवान की प्रतिमा हमेशा नम रहती है। 
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