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New Study: नए शोध में डराने वाला दावा, मिल जाएंगे महाद्वीप, आग उगलेगा सूरज और खत्म हो जाएंगे इंसान

Tue, 12 Nov 2024 01:30 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

New Study: शोध के मुताबिक, पृथ्वी के महाद्वीप आखिरकार एक भूभाग (लैंडमास) में समा जाएंगे। इसे पैंजिया अल्टिमा कहा जाता है। इस सुपरकॉन्टिनेंट से पृथ्वी का जलवायु  नाटकीय रूप से बदल सकता है।
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नए शोध में डराने वाला दावा - फोटो : Adobe Stock
New Study: दुनियाभर में गर्मी लगातार बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रह सकता है। यूरोप की जलवायु एजेंसी ने भी कुछ दिन पहले ठीक यही अनुमान जाहिर किया है। धरती पर बढ़ता तापमान बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। एक नए शोध में डराने वाला खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि भविष्य में ज्यादा तापमान डायनासोर के बाद धरती पर पहली बार बड़े पैमाने पर इंसानों के विलुप्त होने की वजह बन सकता है। 

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अनुसंधान सहयोगी अलेक्जेंडर फार्न्सवर्थ के नेतृत्व में नेचर जियोसाइंस में भविष्य के सुपरकॉन्टिनेंट और दूसरे जलवायु परिवर्तनों के प्रभाव की जानकारी हासिल करने के लिए शोध किया गया है। इस शोध में डराने वाले संकेत मिले हैं। शोध के मुताबिक, पृथ्वी के महाद्वीप आखिरकार एक भूभाग (लैंडमास) में समा जाएंगे। इसे पैंजिया अल्टिमा कहा जाता है। इस सुपरकॉन्टिनेंट से पृथ्वी का जलवायु नाटकीय रूप से बदल सकता है। इसके कारण बेहद गर्म और शुष्क परिस्थितियां उत्पन्न होंगी, जहां पर जीवित रहना संभव नहीं होगा। इसके कारण इंसान खत्म हो जाएंगे। 
 
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नए शोध में भविष्य में मौसम में बदलाव पर दी गई है चेतावनी - फोटो : Adobe Stock
शोध के लिए इस्तेमाल हुआ खास मॉडल 

वैज्ञानिकों ने इस शोध में सुपरकंप्यूटर जलवायु मॉडल का इस्तेमाल किया है। टीम ने इसके माध्यम से दिखाया कि किस तरह यह लेआउट इंसानों के लिए एक खराब ग्रह का निर्माण कर सकता है। डॉक्टर फार्न्सवर्थ ने कहा कि नए उभरे सुपरकॉन्टिनेंट से पथ्वी पर इंसानों को तिहरी मार झेलनी पड़ेगी। इसमें महाद्वीपीय प्रभाव, गर्म सूर्य और वायुमंडल में ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड शामिल है। इससे पृथ्वी के ज्यादातर भाग में बेतहाशा गर्मी बढ़ेगी। 
 
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नए शोध में डराने वाला दावा - फोटो : Adobe Stock
शोध से पता चलता है कि इन वजहों से असहनीय तापमान बढ़ेगा। पहले महाद्वीपीय प्रभाव की बात करें, तो जैसे-जैसे भूमि ठंडे महासागरीय प्रभावों से दूर होगी, महाद्वीप पर वैसे-वैसे तापमान बढ़ता जाएगा। दूसरा गर्म सूर्य से मतलब यह है कि सूरज बहुत अधिक ऊर्जा उत्सर्जित करेगा और धरती गर्म होती चली जाएगी। कार्बन डाइऑक्साइड की बात जाए, तो टेक्टोनिक शिफ्ट से ज्वालामुखी गतिविधि अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ेगी, जिससे वायुमंडल में गर्मी बरकरार रहेगी। 

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नए शोध में डराने वाला दावा - फोटो : Adobe Stock
नहीं बचेगा भोजन और पानी

अलेक्जेंडर फार्न्सवर्थ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस संयोजन से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री से 122 डिग्री फारेनहाइट) के बीच पहुंच जाएगा। इसके साथ ही हो सकता है कि दैनिक चरम सीमा और आर्द्रता भी बढ़ जाए। इंसान और दूसरे जीवों के लिए इस गर्मी को झेलना मुश्किल होगा। शोध से पता चलता है कि पैंजिया अल्टिमा के सिर्फ 8 प्रतिशत से 16 फीसदी स्तनधारियों के लिए उपयुक्त होने की संभावना है। अधिकतर भूभाग को ज्यादा गर्मी और सूखे का सामना करना पड़ेगा। इसके कारण भोजन और पानी की भयावह कमी होगी। 

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नए शोध में डराने वाला दावा - फोटो : Adobe Stock
शोधकर्ता ने इस तरफ ध्यान दिलाया है। हालांकि ऐसी स्थिति लाखों साल बाद उतपन्न होगी। इसके बाद भी शोधकर्ता वर्तमान समय के जलवायु संकट की तरफ ध्यान देने पर जोर दे रहे हैं। शोधकर्ता का कहना है कि वर्तमान के जलवायु संकट को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। 
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