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Somnath Temple: हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना है मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य?

Sun, 11 Jan 2026 04:31 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Somnath Temple: गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग है। हिंदुओं के लिए सोमनाथ मंदिर एक पवित्र स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण खुद चंद्रदेव ने की थी।
 
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हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - फोटो : Adobe Stock
Somnath Temple: गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पर साल 1026 में महमूद गजनवी ने हमला कर ध्वस्त कर दिया था, जिसके वर्ष 2026 में 1000 साल पूरे हो रहे हैं। हमले के 1000 साल पूरे होने पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है। सोमनाथ मंदिर भारत के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग है।
  • भगवान शिव का यह प्रसिद्ध मंदिर भारत की आत्मा, आस्था और गौरव का एहसास कराता है। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि हजारों साल पुरानी भारतीय सभ्यता, विश्वास और संघर्ष की कहानी भी बताता है। आज हम आपको बताता हैं कि सोमनाथ मंदिर दुनिया भर के मंदिरों में इतना खास है और इसका क्या रहस्य है? 
 
  • सोमनाथ मंदिर में देवों के देव महादेव विराजमान हैं। हिंदुओं के लिए सोमनाथ मंदिर एक पवित्र स्थान है। कहा जाता है कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना खुद चंद्रदेव ने की थी। इसका ऋग्वेद में भी जिक्र मिलता है। इस मंदिर पर महमूद गजनवी समेत कई मुगल शासकों ने आक्रमण किया और लूटा, लेकिन इसका वैभव आज भी वैसा का ही वैसा है। 
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हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - फोटो : Adobe Stock
कैसे हवा में झूलता था शिवलिंग? 
  • प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर को मुगल शासकों ने कई बार नष्ट किया। इसके बाद कई बार मंदिर का दोबार निर्माण हुआ है। कहा जाता है कि सोमनाथ मंदिर में बिना किसा सहारे ज्योतिर्लिंग हवा में स्थित था। 

शिवलिंग को देखकर क्यों हैरान था महमूद गजनवी? 
 
  • सोमनाथ मंदिर का हवा में तैरता शिवलिंग एक प्राचीन वास्तुशिल्प चमत्कार माना जाता है। इस बारे में बताया जाता है कि यह चुंबकीय शक्ति का इस्तेमाल करके बिना किसी सहारे के हवा में स्थित था। शिवलिंग को हवा में देखकर महमूद गजनवी हैरान हो गया था। 
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हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - फोटो : Adobe Stock
क्यों यहां चंद्रदेव ने की भगवान शिव की आराधना?
  • धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान चंद्रदेव से इस मंदिर का संबंध है। उन्होंने अपने ससुर दक्ष प्रजापति से के श्राप से मुक्त होने के लिए यहां पर भगवान शिव की आराधना की थी। 

चंद्रदेव को क्यों मिला था श्राप?
  • पौराणिक कथाओं के मुताबिक, चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से शादी की थी, लेकिन वह रोहिणी से सबसे ज्यादा प्रेम करते थे और अन्य पत्नियों के साथ भेदभाव रखते थे।
 
  • चंद्रदेव की शिकायत दक्ष की अन्य पुत्रियों ने अपने पिता से की, तो इससे क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को श्राप दिया था कि तुम्हें अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड है, तुम्हारी चमक धूमिल हो जाएगी। इससे चंद्र का तेज कम होने लगा।

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हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - फोटो : अमर उजाला
चंद्रदेव को कैसे मिली श्राप से मुक्ति?
  • इससे दुखी होकर चंद्रदेव ब्रह्मा के पास पहुंचे और उन्होंने श्राप से मुक्त होने का उपाय पूछा। ब्रह्माजी ने चंद्रदेव को भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी। इसके बाद चंद्रदेव ने प्रभास क्षेत्र (अब सोमनाथ) में भगवान शिव की घोर तपस्या की और शिवलिंग की स्थापना की।
 
  • चंद्रदेव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चंद्रदेव को दर्शन दिए और उनको श्राप मुक्त किया। भगवान शिव ने उन्हें अंधकार के श्राप से मुक्ति का आशीर्वाद दिया और अपने मस्तक पर धारण किया। 
 
  • चंद्रदेव ने भगवान शिव से ज्योतिर्लिंग के रूप में वास करने की प्राथना की और यह सोमनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस मंदिर को सोमेश्वर महादेव भी कहा जाता है। 
 
  • चंद्रदेव ने ही यहां पर सोने से मंदिर का निर्माण कराया था। इसके बाद सूर्य देवता ने चांदी से यहां पर मंदिर बनवाया था। भगवान श्री कृष्ण ने चंदन की लकड़ी से सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में सोलंकी राजपूतों ने इसे पत्थर से भव्यता प्रदान की। 
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हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - फोटो : Adobe Stock
कितना पुराना है मंदिर?
  • सोमनाथ मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, श्रीमद् आज जगतगुरु शंकराचार्य वैदिक शोध संस्थान वाराणसी के अध्यक्ष स्वामी गजानन सरस्वती ने स्कंद पुराण के प्रभास खंड की परंपराओं से मंदिर की स्थापना की तिथि बताई है। उसके मुताबिक, मंदिर की स्थापना 7 करोड़ 99 लाख 25 हजार 105 साल पहले हुई थी। इस प्रकार यह मंदिर आदिकाल से हिंदुओं का प्रेरणा स्रोत है। 

क्या है बाण स्तंभ का रहस्य?
  • मंदिर के दक्षिण में समुद्र के किनारे एक बाण स्तंभ है, जो छठी शताब्दी से मौजूद है, जिसके बारे में किसी को भी अधिक जानकारी नहीं है। बाण स्तंभ एक दिशादर्शक स्तंभ है, जिसके ऊपरी सिरे पर एक तीर बना हुआ है, जिसका मुंख समुद्र की तरफ है। इस पर आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव, पर्यंत अबाधित ज्योतिमार्ग'' लिखा है। इसका मतलब है कि समुद्र के इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक सीधी रेखा में कोई बाधा नहीं है।
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