अंतरिक्ष
कितनी कामयाब होगी ये कोशिश
हम अक्सर ये सोचते हैं कि उल्कापिंड, अंतरिक्ष में तैर रहे बड़े-बड़े बोल्डर होते हैं। लेकिन ये शायद रबर के बड़े से गुच्छे होते हैं। बहुत अस्थिर होते हैं। इन्हें बगैर गुरुत्वाकर्षण वाले अंतरिक्ष में काटना बहुत बड़ी चुनौती है।
इंसान बहुत कम बार ही उल्कापिंड के पास जा पाता है। ऐसे में इनसे नमूने निकालना भी बड़ा मुश्किल का काम है।
स्वतंत्र रूप से काम करने वाली भौतिकीविद् मीका मैक्किनोन कहती हैं, ''हो सकता है कि उल्कापिंड की चट्टानों में बर्फ भी मिली हो और काटने के दौरान आग भी लग सकती है। हो सकता है कि चट्टानों के भीतर गैस हो। तब मामला और ख़तरनाक हो जाता है।''
अब तक जापान के वैज्ञानिकों की टीम ने तामाहागाने स्टील से बने यंत्रों को बड़े से पाइप के भीतर गिराकर नमूने जुटाने का प्रयोग किया है। इसके नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कई बार ये चट्टानें काटने में कामयाब रहे, तो कई बार ये नमूने को सुरक्षित लेकर ऊपर नहीं आ सके। अब काटने के बाद ये नमूने अंतरिक्षयान के इस स्कूप से गिरें नहीं, इसका तोड़ निकालना है।
तलवार बनाने की तकनीक का अंतरिक्ष मिशन में ये पहली बार इस्तेमाल हो रहा है। तो, क्या ऐसी धातु से अंतरिक्ष मिशन को कामयाब बनाया जा सकता है? मीका मैक्किनोन को इसका भरोसा नहीं है। लेकिन वो ये मानती हैं कि जापान में समुराई तलवारों से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव रहा है। मैक्किनोन कहती हैं, ''जब इतनी जज्बाती जुड़ाव वाली चीजें हम अंतरिक्ष में भेजते हैं, तो ये लगता है कि हमने किसी अपने को इस मिशन पर भेजा है।''
शायद तामाहागाने की यही सबसे बड़ी ख़ूबी है कि ये धरती और उल्कापिंड के बीच के इस संपर्क को ऐसे लोहे से जोड़ता है जिसका शानदार इतिहास रहा है। हो सकता है कि हम इसकी मदद से उल्कापिंड के नमूने धरती पर लाने में कामयाब भी हो जाएं। ऐसा हुआ तो समुराई योद्धाओं की बहादुरी के किस्सों में ये अंतरिक्ष मिशन भी जुड़ जाएगा, जो जापान की आने वाली नस्लों को हौसला देगा।