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अंतरिक्ष में विशालकाय चट्टानों को काटेगी ये तलवार, इसकी 'धार' का नहीं होगा अंदाजा

Mon, 26 Nov 2018 10:43 AM IST
क्रिस बारानियूक
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Samurai Sword - फोटो : BBC
सदियों से जापान के समुराई योद्धाओं के लिए बनाई जाने वाली ये तलवारें बेहद धारदार और मजबूत होती हैं। ये अच्छे से तपाए गए लोहे से बनती हैं, जो बेहद सख्त होता है। ऑनलाइन आपको तमाम ऐसे वीडियो मिल जाएंगे जिसमें धारदार समुराई तलवारों से लकड़ी के मोटे गट्ठरों से लेकर पाइप तक काटते दिखेंगे। जापानी भाषा में समुराई तलवारों को 'कटाना' कहते हैं।

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अंतरिक्ष कचरा
अब तीन इंजीनियर, जापान के एक मशहूर तलवार निर्माता के साथ मिलकर इसी लोहे से एक मशीन बनाने में जुटे हैं, जो उल्कापिंड से चट्टानों के नमूने काट कर ले आएगी। जापान के अंतरिक्ष मिशन हयाबूसा के जरिए अंतरिक्ष यान रियूगू नाम के उल्कापिंड की पड़ताल के लिए भेजे गए हैं।
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Meteor
इनमें उल्कापिंड का चक्कर लगाने वाले यान से लेकर इस पर कदम रखने वाले रोवर तक शामिल हैं। लेकिन कोई भी मिशन इस उल्कापिंड से चट्टानों के नमूने नहीं ला सका। हर बार मिशन नाकाम रहा।

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Space Life
एक लेख में जापान के कनागावा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के ताएको वातानाबे और 70 साल के जेनरोकुरो मत्सुनागा ने मिलकर इस मिशन के बारे में विस्तार से लिखा है।
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Samurai Sword - फोटो : fastjapan.com
मत्सुनागा समुराई तलवारें बनाने के उस्ताद हैं। उन्होंने नई तकनीक की मदद से ऐसी कटाई मशीन बनाई है जिसमें तामाहागाने का इस्तेमाल हुआ है। तामाहागाने, लोहे और तारकोल से बनता है। इसी से मशहूर जापानी तलवारें बनाई जाती हैं। इनकी धार बहुत तेज होती है। दोनों ने लिखा है कि जापानी तलवार की मजबूती का फायदा उठाने के लिए ही हमने अंतरिक्ष भेजी जाने वाली इस मशीन को तामाहागाने से बनाया है।
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Samurai Sword - फोटो : mp3.xyz
मत्सुनागा ने जापान के समुद्री तटों पर मिलने वाली लोहे के कणों वाली बालू को इकट्ठा किया। फिर उसे गलाकर तपाया ताकि तामाहागाने तैयार कर सकें। इस प्रक्रिया में लोहे के कणों को ख़ूब तेज गर्म करके फिर ठंडा किया जाता है। ये प्रक्रिया कई बार करने से लोहा बहुत सख़्त हो जाता है। इस से कठोर से कठोर चीज काटी जा सकती है।
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Samurai Sword - फोटो : Max Pixel
इस लोहे से गोलाकार यंत्र तैयार हुए हैं जिनकी धार ब्लेड जैसी है। जो अंदर की तरफ मुड़े हुए हैं। असल में जापान के अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस यंत्र को अंतरिक्ष यान से रियूगू उल्कापिंड पर भेजना चाहते हैं। फिर जैसे आइसक्रीम को निकालने वाला स्कूप होता है, ठीक उसी तरह इस यंत्र से उल्कापिंड की मिट्टी और चट्टानें निकालकर वापस धरती पर लाने की योजना है।

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अंतरिक्ष कचरा
अंतरिक्ष से सैंपल लाना कितना मुश्किल
 
2005 में हयाबूसा के एक मिशन के दौरान जापान के वैज्ञानिकों को अंदाजा हो गया था कि किसी उल्कापिंड से चट्टानों के सैंपल लाना कितना मुश्किल है। रियूगू से चट्टानों के नमूने लाने की दो कोशिशें नाकाम रही थीं। जो मशीनें भेजी गई थीं, वो कुछ धूल के कण ही वापस धरती पर ला सकी थीं।

इतने छोटे नमूने की ठीक से पड़ताल नहीं हो सकती। सो, अब नये हयाबूसा मिशन के जरिए एक बार फिर उल्कापिंड से चट्टानों के नमूने जमा करने की तैयारी हो रही है। समुराई तलवारों की तकनीक की मदद से शायद उल्कापिंड की चट्टानें काटना ज्यादा आसान हो।

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असल में उल्कापिंड की सतह लाखों बरस से ब्रह्मांड की किरणों की बौछार झेल चुकी होती हैं। इस पर रेडियोएक्टिव किरणों से लेकर सूरज की एक्स-रे तक कहर बरपा चुकी होती है। हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के मार्टिन एल्विस कहते हैं, ''उल्कापिंड के नमूने हमें सौरमंडल के इतिहास के बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं। इसके लिए हमें उसके सीने से चट्टानों के नमूने निकालने होंगे। गहरी खुदाई की जरूरत होगी।''

दिक्कत ये है कि उल्कापिंड हल्के होते हैं। इनमें गुरुत्वाकर्षण नहीं होता। तो बहुत जोर से किसी चीज से चोट पहुंचाने पर वो अक्सर उछल जाते हैं। मार्टिन एल्विस कहते हैं कि, ''कोई भी ऐसी चीज जो कम ताकत का इस्तेमाल करके उल्कापिंड की सतह के भीतर से नमूने निकाल लाए, तो बेहतर रहे। तामाहागाने स्टील इसमें कारगर साबित हो सकता है।''
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अंतरिक्ष
कितनी कामयाब होगी ये कोशिश

हम अक्सर ये सोचते हैं कि उल्कापिंड, अंतरिक्ष में तैर रहे बड़े-बड़े बोल्डर होते हैं। लेकिन ये शायद रबर के बड़े से गुच्छे होते हैं। बहुत अस्थिर होते हैं। इन्हें बगैर गुरुत्वाकर्षण वाले अंतरिक्ष में काटना बहुत बड़ी चुनौती है।
इंसान बहुत कम बार ही उल्कापिंड के पास जा पाता है। ऐसे में इनसे नमूने निकालना भी बड़ा मुश्किल का काम है।

स्वतंत्र रूप से काम करने वाली भौतिकीविद् मीका मैक्किनोन कहती हैं, ''हो सकता है कि उल्कापिंड की चट्टानों में बर्फ भी मिली हो और काटने के दौरान आग भी लग सकती है। हो सकता है कि चट्टानों के भीतर गैस हो। तब मामला और ख़तरनाक हो जाता है।''

अब तक जापान के वैज्ञानिकों की टीम ने तामाहागाने स्टील से बने यंत्रों को बड़े से पाइप के भीतर गिराकर नमूने जुटाने का प्रयोग किया है। इसके नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कई बार ये चट्टानें काटने में कामयाब रहे, तो कई बार ये नमूने को सुरक्षित लेकर ऊपर नहीं आ सके। अब काटने के बाद ये नमूने अंतरिक्षयान के इस स्कूप से गिरें नहीं, इसका तोड़ निकालना है।

तलवार बनाने की तकनीक का अंतरिक्ष मिशन में ये पहली बार इस्तेमाल हो रहा है। तो, क्या ऐसी धातु से अंतरिक्ष मिशन को कामयाब बनाया जा सकता है? मीका मैक्किनोन को इसका भरोसा नहीं है। लेकिन वो ये मानती हैं कि जापान में समुराई तलवारों से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव रहा है। मैक्किनोन कहती हैं, ''जब इतनी जज्बाती जुड़ाव वाली चीजें हम अंतरिक्ष में भेजते हैं, तो ये लगता है कि हमने किसी अपने को इस मिशन पर भेजा है।''

शायद तामाहागाने की यही सबसे बड़ी ख़ूबी है कि ये धरती और उल्कापिंड के बीच के इस संपर्क को ऐसे लोहे से जोड़ता है जिसका शानदार इतिहास रहा है। हो सकता है कि हम इसकी मदद से उल्कापिंड के नमूने धरती पर लाने में कामयाब भी हो जाएं। ऐसा हुआ तो समुराई योद्धाओं की बहादुरी के किस्सों में ये अंतरिक्ष मिशन भी जुड़ जाएगा, जो जापान की आने वाली नस्लों को हौसला देगा।
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