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समुद्र में इसलिए डूब जाते हैं विशालकाय जहाज, ये हैं खास वजहें

Sat, 03 Nov 2018 06:42 PM IST
बीबीसी हिन्दी
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- फोटो : YouTube
समुद्र में जब हम बड़े-बड़े जहाज तैरते देखते हैं तो लगता है ये जहाज समुद्र से लोहा लेने के लिए उसके सीने पर सवार हैं। लेकिन हकीकत ये है कि अपने साइज से डरा देने वाले ये जहाज कभी समुद्र के एक थपेड़े से पलट जाते हैं, तो कभी खुद अपने ही वजन से डूब जाते हैं। विशाल मालवाहक जहाजों में बहुत तरह का सामान लाद कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है। इसमें बहुत तरह की धातु, अयस्क और खनिज रेत भी ले जाए जाते हैं। लेकिन इन जहाजों पर लदा माल ही इनके डूबने की वजह बनता है।
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लिक्विफैक्शन की प्रक्रिया- अभी तक अनगिनत जहाज समुद्र में समा चुके हैं। एक अंदाजे के मुताबिक हर साल लगभग 10 बड़े मालवाहक जहाज समंदर में समा जाते हैं। और इन जहाजों पर सवार कर्मचारी बेमौत मारे जाते हैं। कार्गो जहाजों में धातुओं के जो अयस्क लादे जाते हैं, अक्सर वो केमिकल रिएक्शन से गलने लगते हैं। इस प्रक्रिया को लिक्विफैक्शन कहते हैं।
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2015 में 56 किलो टन का मालवाहक जहाज ज्यूपिटर दक्षिण-पश्चिम वियतनाम के पास समुद्र में डूब गया था। इसमें सवार 19 कर्मचारियों में से सिर्फ एक बचाया जा सका था। इस हादसे के बाद इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन यानी (आईएमओ) ने कार्गों पर लादे जाने वाले एल्युमिनियम के अयस्क बॉक्साइट के बारे में चेतावनी जारी की थी।

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माल लादने में गलती- दरअसल मालवाहक जहाजों पर माल लादते वक्त खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है। लेकिन इसकी अनदेखी की जाती है। लापरवाही से माल लादने की वजह से जहाज के नीचे पानी में तेजी से उछाल होता है, जिसकी वजह से अयस्क हिलने-डुलने लगते हैं।
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इससे जहाज के संतुलन पर असर पड़ता है। पानी का दबाव बढ़ने की वजह से माल कई बार जहाज के एक ही हिस्से में जमा हो जाता है। जहाज लंबे समय तक एक ही कोण पर झुका रहता है और गलने लगता है। यही नहीं कई बार जलपोत पानी में इतना ज्यादा झुक जाता है कि समुद्र का पानी इसमें आने लगता है और जहाज को डुबोने में अपना किरदार निभाता है। इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने लिक्विफैक्शन रोकने के लिए मानक तय किए हैं। जिसके मुताबिक ये तय कर दिया गया है कि कितनी नमी वाला सामान ले जाया जा सकता है। लेकिन फिर भी हादसे रुक नहीं रहे हैं।
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ship - फोटो : YouTube
जहाज में सामान कैसे रखें?- अगर जहाज पर माल लादने के तरीके में ही थोड़ा सा बदलाव कर दिया जाए तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है। इसके अलावा माल लादने से पहले ये सुनिश्चित करना जरूरी है कि कौन से अयस्क लादे जाएं और कौन से नहीं। साथ ही ये भी देखा जाए कि पानी का दबाव होने पर किस अयस्क में कौन से रासायनिक परिवर्तन होंगे। कहीं ये केमिकल रिएक्शन जहाज गलने की वजह तो नहीं बन जाएंगे।
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साथ ही जहाज पर माल सही तरीके से लादा जाए ये भी ध्यान रखना होगा। ताकि जहाज के किसी एक हिस्से पर दबाव ज्यादा ना बने और जहाज असंतुलित होने से बचा रहे। इसमें नई तकनीक अहम रोल निभा सकती है। जहाजों में पानी के दबाव के लिए सेंसर लगा दिए जाएं तो उससे काफी मदद मिल सकती है।
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- फोटो : GreenPort
इसके अलावा जितने भी अयस्क लादे जाएं उन सब पर नजर रखी जाए। जो अयस्क समंदर की उथल-पुथल में गलने लगते हैं, उन्हें फौरन जहाज से निकाल दिया जाए। इसमें कार्गो कर्मचारियों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। मिसाल के लिए अगर शिप में पानी आ रहा हो तो उसे तुरंत निकाल दें। मौसम का मिजाज देखते हुए जहाज का रास्ता बदल दिया जाए। अगर ऐसी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख लिया जाए तो बड़े हादसों को टाला जा सकता है।
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