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चीन के सरकारी न्यूज चैनल पर होगा कुछ ऐसा, चाहकर भी नहीं कर पाएंगे यकीन

Fri, 09 Nov 2018 11:49 AM IST
क्रिस बारानियूक, बीबीसी
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News Anchor China - फोटो : Must Share News
चीन के सरकारी न्यूज चैनल पर आपको कुछ ऐसा देखने को मिल सकता है, जिस पर शायद आप यकीन न कर पाएं। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी ने अपने स्टूडियो में एक ऐसा वर्चुअल न्यूज एंकर उतार दिया है, जो सूट-टाई पहने हुए होगा और जिसकी आवाज आपको किसी रोबोट जैसी लगेगी। 

शिंहुआ न्यूज एजेंसी का यह दावा है कि ये न्यूज प्रेजेंटर ठीक उसी तरह खबरें पढ़ सकते हैं जिस तरह से प्रोफेशनल न्यूज रीडर खबरें पढ़ते हैं। हालांकि न्यूज एजेंसी की इस बात से हर कोई सहमत तो नहीं है।
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News Anchor China - फोटो : BBC
"हैलो, आप देख रहे हैं इंग्लिश न्यूज प्रोग्राम," अंग्रेजी बोलने वाला ये एंकर अपनी पहली रिपोर्ट कुछ इस अंदाज में पेश करता है। सोगो, एक चीनी सर्च इंजन है। इस सिस्टम को विकसित करने में सोगो का भी अहम योगदान है। ''मैं आप तक सूचनाओं को एक बिल्कुल नए तरीके से पेश करने वाला अनुभव लेकर आऊंगा।"
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News Anchor China - फोटो : BBC
इसी का एक दूसरा वर्जन भी है जो चीनी भाषा में है लेकिन उसे एक दूसरा शख्स पेश करता है। शिंहुआ न्यूज एजेंसी का कहना है कि इससे प्रोडक्शन की लागत में बचत की जा सकेगी। एजेंसी का कहना है कि समय-समय पर ब्रेकिंग न्यूज रिपोर्ट प्रसारित करने के लिए ये तकनीक विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी।

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News Anchor China - फोटो : BBC
दरअसल, इस तकनीक को विकसित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसमें मौलिक प्रेजेंटर की आवाज, लिप मूवमेंट्स और भाव-भंगिमाओं को कॉपी किया गया है।

लेकिन अगर आप ये सोच रहे हैं कि यह किसी इंसान का 3डी डिजिटल मॉडल है तो ऐसा नहीं है, ये उससे बिल्कुल अलग तकनीक है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मिशेल वूलड्रिज का कहना है कि इन प्रेजेंटर्स के लिए ये काफी मुश्किल है कि वो बिल्कुल नेचुरल नजर आएं। "इन्हें कुछ मिनट से ज्यादा देर तक देख पाना संभव नहीं है। उनके चेहरे पर कोई भाव-भंगिमाएं नहीं नजर आती हैं, न कोई लय।।सबकुछ बेहद सपाट।"
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News Anchor China - फोटो : Must Share News
इसके साथ ही वो इस बात पर भी जोर देते हैं कि टीवी पर जो न्यूज एंकर आते हैं लोग उन्हें उनके चेहरे से पहचानते हैं। उनकी पहचान विश्वसनीयता से जुड़ी हुई होती है, ऐसे में ये परंपरागत तरीके से बिल्कुल अलग है।
"आप किसी व्यक्ति से तो  कनेक्शन बना सकते हैं लेकिन किसी एनिमेशन के साथ वो जुड़ाव बना पाना संभव नहीं है।"

वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स के प्रोफेसर नोएल शिर्के का मानना है कि इस पहले प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने बीबीसी से कहा "हम इसमें समय के साथ और सुधार करते रहेंगे।"
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