फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हैरान हो जाएंगे चीन के इस नकली सूरज के बारे में जानकर, असली सूरज से छह गुना होगा ज्यादा गर्म

Sun, 18 Nov 2018 04:49 PM IST
फीचर टीम, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
- फोटो : south china morning post
चीन के वैज्ञानिकों ने मानों प्रकृति को चैलेंज देने की ही ठान रखी है। पहले चीन ने 2020 तक नकली चांद आसमान में चमकाने का दावा किया था इस बार ऊर्जा के अखंड स्त्रोत को ही चुनौती दे है। चीन के वैज्ञानिकों ने अब नकली सूर्य बनाने में भी सफलता हासिल कर ली है। खास बात तो यह है कि चीन का यह नकली सूर्य असली सूरज से छह गुना ज्यादा गर्म होगा।
विज्ञापन

2 of 7
- फोटो : google
चीन के वैज्ञानिकों ने स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए कृत्रिम सूरज बनाने की तैयारी के बारे में बताया है। कहा जा रहा है कि यह कृत्रिम सूरज असली सूरज की अपेक्षा लगभग छह गुना ज्यादा गर्म होगा। असली सूरज का कोर 1.50 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक गरम होता है वहीं चीन का यह नया सूरज 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की गर्मी पैदा कर सकेगा। 
विज्ञापन

3 of 7
Tokamak - फोटो : Institute of Plasma Physics/Chinese Academy of Sciences
माना जा रहा है कि चीन के इस कृत्रिम सूरज में उत्पन्न की गई नाभिकीय ऊर्जा को विशेष तकनीक से पर्यावरण के लिये सुरक्षित ग्रीन ऊर्जा में बदला जा सकेगा, जिससे धरती पर ऊर्जा का बढ़ता संकट तरीकों से दूर किया जा सकेगा। साथ ही वैज्ञानिकों का मानना है कि जरूरत पड़ने पर ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।  

4 of 7
Institute of plasma physics - फोटो : english.ipp.cas.cn
चीन के इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस के वैज्ञानिकों के मुताबिक ये आर्टिफिशियल सूरज की टेस्टिंग जारी है। इसे द एक्सपेरिमेंटल एडवांस सुपरकंडक्टिंग टोकामाक (ईस्ट) नाम दिया गया है। कृत्रिम सूरज को न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिए पैदा किया जाएगा। यह सौर मंडल के मध्य में स्थित किसी तारे की तरह ही ऊर्जा का भंडार उपलब्ध कराएगा। आपको बता दें कि धरती से करीब पंद्रह करोड़ किलोमीटर सूर्य दूर है। 
विज्ञापन

5 of 7
artificial sun - फोटो : Reuters
ईस्ट को एक मशीन के जरिए पैदा किया जाता है। इस मशीन का साइज बीच में खोखले गोल बॉक्स (डोनट) की तरह है। इसमें न्यूक्लियर फ्यूजन (परमाणु के विखंडन) के जरिए गर्मी पैदा की जा सकती है। आपको बता दें कि इसे एक दिन के लिए चालू करने का खर्च लगभग ग्यारह लाख रुपए है। फिलहाल इस मशीन को चीन के अन्हुई प्रांत स्थित साइंस द्वीप में रखा गया है।   
विज्ञापन

6 of 7
EAST tokamak - फोटो : Fusion Group
आर्टिफिशियल सूरज यानी ईस्ट को बनाने के लिए हाइड्रोजन गैस को 5 करोड़ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर गर्म कर, उस तापमान को 102 सेकंड तक स्थिर रखा गया। बता दें कि असली सूरज में हीलियम और हाइड्रोजन जैसी गैसें उच्च तापमान पर और ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं। इस तापमान को पाने के लिए कई सालों तक प्रयोग किए गए। कई बार ऐसा भी हुआ कि न्यूक्लियर फ्यूजन चैंबर का कोर इतने तापमान से पिघल गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
दरअसल, दुनिया में इस समय न्यूक्लियर फिजन (परमाणु संलयन) के जरिए ऊर्जा पैदा की जा रही है। हालांकि, इसकी वजह से पैदा होने वाला जहरीला न्यूक्लियर कचरा इंसानों के लिए काफी खतरनाक है। माना जा रहा है कि इस सूरज से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी। ये भी माना जा रहा है कि इस सूरज में उत्पन्न की गई नाभिकीय ऊर्जा को विशेष तकनीक से पर्यावरण के लिये सुरक्षित ग्रीन ऊर्जा में बदला जा सकेगा, जिससे धरती पर ऊर्जा का बढ़ता संकट तरीकों से दूर किया जा सकेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें