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Richest Princess: मुगल काल की सबसे 'अमीर शहजादी' थी इस बादशाह की बेटी, मां की आधी संपत्ति की थी मालकिन

Wed, 26 Mar 2025 04:05 PM IST
दीक्षा पाठक फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Richest Princess In The World: जहां आरा सिर्फ एक शहजादी नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक, विद्वान और कला संरक्षक भी थीं। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें उस दौर की सबसे 'अमीर शहजादी' भी कहा जाता है।
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प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik.com
मुगल साम्राज्य के इतिहास में कई रानियां और शहजादियां आईं, लेकिन कुछ ऐसी भी थीं, जिन्होंने केवल अपने शाही खून की वजह से नहीं, बल्कि अपनी बुद्धिमानी और काबिलियत के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई। ऐसी ही एक शख्सियत थीं जहां आरा बेगम। वे सिर्फ एक शहजादी नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक, विद्वान और कला संरक्षक भी थीं। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें उस दौर की सबसे 'अमीर शहजादी' भी कहा जाता है।
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प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik.com
शाही विरासत और बेशुमार दौलत
23 मार्च 1614 ईस्वी में जन्मी जहां आरा, मुगल बादशाह शाहजहां और उनकी सबसे प्रिय बेगम मुमताज महल की सबसे बड़ी संतान थीं। महज 14 वर्ष की उम्र में उन्हें सालाना छह लाख रुपये का वजीफा मिलने लगा, जिससे वे उस समय की सबसे धनी शहजादी बन गईं। शाहजहां की कृपा से वे राजमहल की सबसे प्रभावशाली सदस्य बन गई थीं।
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प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik.com
मुमताज महल की मिली आधी संपत्ति
इतिहासकार बताते हैं कि 1631 ईस्वी में मुमताज महल की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति को उनके बच्चों में बांटा गया, जिसमें से आधा हिस्सा जहां आरा को मिला। इसके अलावा, वे कई जागीरों और असीमित दौलत की मालकिन थीं। उस दौर में एक लाख रुपये की कीमत भी अपार थी और जहां आरा को तो सालाना दस लाख रुपये का वजीफा मिलता था।

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प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik.com
महल की थीं ‘पादशाह बेगम’
अपनी मां की मृत्यु के बाद, महज 17 वर्ष की उम्र में, जहां आरा को राजमहल की सर्वोच्च महिला के रूप में चुना गया और उन्हें ‘पादशाह बेगम’ की उपाधि भी दी गई। इस निर्णय ने उन्हें मुगल दरबार और प्रशासन में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।
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प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik.com
राजनीति की भी थी गहरी समझ
बता दें कि जहां आरा सिर्फ एक उपाधि की अधिकारी नहीं थीं, बल्कि वे राजनीति और प्रशासन में गहरी समझ रखती थीं। उन्होंने महल और दरबार की बागडोर संभालने के साथ-साथ शाहजहां की सलाहकार के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी बुद्धिमानी और दूरदर्शिता ने उन्हें महल के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल कर दिया।
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प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik.com
जहां आरा ने बनाया था चांदनी चौक का मूल डिजाइन
आज दिल्ली का चांदनी चौक देश के सबसे ऐतिहासिक और व्यस्त बाजारों में से एक है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका मूल डिजाइन जहां आरा बेगम ने तैयार किया था। वे केवल प्रशासनिक मामलों में ही नहीं, बल्कि वास्तुकला में भी पारंगत थीं। उन्होंने दिल्ली के शाहजहांनाबाद शहर में कई महत्वपूर्ण इमारतों के निर्माण में योगदान दिया।
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भाई के लिए दी कुर्बानी 
जहां आरा अपने छोटे भाई दारा शिकोह के बेहद करीब थीं। जब उत्तराधिकार की लड़ाई छिड़ी, तो उन्होंने अपने भाई का पूरा समर्थन किया। लेकिन जब औरंगजेब ने सत्ता हथिया ली, तो उसने उन्हें और उनके पिता शाहजहां को आगरा के किले में कैद कर दिया। हालांकि, समय के साथ औरंगजेब और जहां आरा के बीच संबंधों में सुधार हुआ और उसने उन्हें ‘राजकुमारी की महारानी’ की उपाधि प्रदान की। जहां आरा ने आजीवन विवाह नहीं किया। 1681 ईस्वी में 67 वर्ष की आयु में जहां आरा का निधन हुआ और उन्हें हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के पास दफनाया गया।
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