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इस गांव में नेता नहीं कर पाते प्रचार, फिर भी वोटिंग होती है 95 प्रतिशत के पार

Mon, 22 Apr 2019 04:19 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में गुजरात की 26 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान है। मतदान से पहले यहां चुनाव प्रचार थम गया है लेकिन राज्य में एक गांव ऐसा भी है जहां कोई नेता प्रचार के लिए नहीं जाता है। दरअसल, राजकोट जिले के राजसमढियाल गांव का नियम है कि किसी भी चुनाव में कोई भी नेता यहां प्रचार करने नहीं आ सकता।
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Rajsamadhiyala village - फोटो : ANI
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यहां लोग चुनाव का बहिष्कार करते हैं बल्कि लोगों का मानना है कि नेताओं के प्रचार के गांव का माहौल खराब होता है। गांव के सरपंच अशोक भाई भी इसकी पुष्टि करते हैं और यही कारण है कि जहां देशभर में चुनावी रैलियां हो रही हैं, वहीं इस गांव में कोई चुनावी शोर सुनाई नहीं देता।
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सरपंच अशोक भाई वाघेला - फोटो : ANI
राजसमढियाल की इस अनोखी परंपरा की जानकारी देते हुए सरपंच अशोक भाई वाघेला बताते हैं कि जब हरदेव सिंह सरपंच बने तब से ही गांव में नेताओं के चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगा हुआ है। बता दें कि, यह बैन सिर्फ सरपंच ने नहीं लगाया बल्कि गांव वाले भी इसके समर्थन में हैं। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि यहां लोगों का मानना है कि गांव में चुनाव प्रचार से यहां का माहौल खराब हो जाता है।

वोट न डालने वाले पर जुर्माना 

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- फोटो : ANI
दूसरी तरफ इस गांव की एक खास बात यह भी है कि यहां हर शख्स वोट डालने जाता है क्योंकि यह अनिवार्य है। जो भी 18 साल से ऊपर है उसे वोट डालना ही होता है। अशोक भाई बताते हैं कि जो लोग वोट नहीं डालते उन पर 51 रुपयों का जुर्माना भी लगाया जाता है। वैसे हर बार कोशिश यही रहती है कि 100 प्रतिशत वोटिंग हो।
 
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- फोटो : ANI
लेकिन वोटर लिस्ट में ऐसे भी लोगों के नाम हैं जो मर चुके हैं या उन लड़कियों के नाम भी शामलि हैं जिनकी शादी हो गई है और वे कहीं और चली गई हैं। फिर भी यहां वोटिंग प्रतिशत 95 से 96 प्रतिशत तक रहता है। वैसे यह गांव सिर्फ इसी वजह से चर्चा में नहीं रहता। यह गुजरात का ऐसा आदर्श गांव है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां कोई भी अपने घर या दुकान में ताला नहीं डालता। 

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