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4000 साल पहले पॉपकॉर्न को खाया नहीं सजाया जाता था, रोचक है इसके पीछे की कहानी

Mon, 16 Sep 2019 04:49 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अगर आप सिनेमाघरों में फिल्म देखने जाएं और पॉपकॉर्न न खाएं तो फिल्म अधूरी सी लगती है। आज पॉपकॉर्न दुनियाभर की पहचान बन गया है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि लगभग 4000 साल पहले पॉपकॉर्न को खाया नहीं बल्कि सजाया जाता था। इसके पीछे की कहानी बड़ी है रोचक है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में सबसे पहले अमेरिका के मूल निवासी पॉपकॉर्न खाया करते थे। हालांकि बाद में वहां रहने वाले यूरोपीय लोगों ने भी इसे खाना शुरू कर दिया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दुनिया में पहली बार पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन 134 साल पहले यानी वर्ष 1885 में बनी थी। इस मशीन को अमेरिका के रहने वाले चार्ल्स क्रेटर ने बनाया था। हालांकि उस समय वो मूंगफली भूनने के लिए एक मशीन बना रहे थे, जो आगे चलकर पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन बन गई। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इतिहासकार एंड्र्यू स्मिथ लिखते हैं कि चार्ल्स क्रेटर और उनके सहायक अपनी पॉपकॉर्न भूनने की मशीन को वर्ष 1893 के वर्ल्ड फेयर में लेकर गए थे। वहां वह दोनों आवाज लगाकर लोगों को पॉपकॉर्न चखने के लिए बुलाते थे और मशीन के साथ एक बैग मुफ्त में देने का वादा करते थे। आज चार्ल्स क्रेटर की कंपनी अमेरिका में पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन बनाने की सबसे बड़ी कंपनी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कहा जाता है कि पॉपकॉर्न की खोज लगभग 4000 साल पहले न्यू मैक्सिको में हुई थी। तब यह चमगादड़ से भरी एक गुफा में मिला था, लेकिन उस वक्त किसी को यह मालूम नहीं था कि इसे खाया भी जाता है। तब इसे सजाने के काम में लाया जाता था। उस समय इससे सिर और गले के आभूषण बनाए जाते थे। 
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