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Ajab Gajab: मशीन के अंदर 70 साल गुजार डाले शख्स ने और बना वकील, बचपन से ही आधे शरीर में था लकवा

Tue, 26 Nov 2024 05:30 PM IST
शिखर बरनवाल फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

पॉल अलेक्जेंडर एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनकी जिंदगी एक आयरन लंग(लोहे के फेफड़े)  के अंदर सिमट कर रह गई थी। 6 साल की उम्र में पोलियो की चपेट में आने के बाद, उन्हें अपनी जिंदगी के अगले 70 साल इस मशीन के सहारे गुजारने पड़े।
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आयरन लंग में लेटे हुए पॉल अलेक्जेंडर - फोटो : www.guinnessworldrecords.com
Paul Alexander: दुनिया में ऐसी कई बीमारियां हैं जो अगर किसी को हो जाए तो जिंदगी बेहद कठिन हो जाती है। पोलियो भी उन्हीं बीमारियों में से एक है। आज हम आपको पोलियो से ग्रसित एक ऐसे शख्स की हैरतअंगेज कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अपनी जिंदगी के 70 साल एक मशीन के सहारे गुजारनी पड़ी। हम बात कर रहे हैं पॉल अलेक्जेंडर की। पॉल अलेक्जेंडर एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनकी जिंदगी एक आयरन लंग(लोहे के फेफड़े) के अंदर सिमट कर रह गई। आयरन लंग मशीन में पॉल की गर्दन और सिर बाहर रहता था, बाकी का शरीर मशीन के अंदर पूरी तरह से सील होता था। इस मशीन में हवा का दबाव कम और ज्यादा करके सांस लेने का काम किया जाता था। पॉल को इस मशीन से कभी अलग नहीं किया जा सकता था, यही वजह थी कि नहाना, खाना, सोना, सब कुछ इसी मशीन के अंदर ही करना पड़ता था।
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आयरन लंग - फोटो : Adobe Stock
कौन थे पॉल अलेक्जेंडर?
पॉल अलेक्जेंडर का जन्म 30 जनवरी 1946 अमेरिका के टेक्सस राज्य में हुआ था। 1952 में पोलियो की चपेट में आने के बाद उन्हें अपनी जिंदगी आयरन लंग के मदद के सहारे गुजारना पड़ा था। पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी होने के बावजूद, पॉल ने कानून की पढ़ाई पूरी की और वकील बन गए। पॉल अलेक्जेंडर, आयरन लंग में रहते हुए उन्होंने कानूनी परीक्षाओं को पास किया, जो कि अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी।
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ऐसा दिखता है आयरन लंग - फोटो : Adobe Stock
21 मार्च 2024 को 76 साल के उम्र में उनका देहांत हुआ। उन्होंने 70 सालों तक अपनी जिंदगी आयरन लंग के अंदर गुजारा। इसके साथ ही उन्होंने एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड बनाया, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। पॉल अलेक्जेंडर दुनिया के इकलौते व्यक्ति बने जो आयरन लंग में सबसे अधिक वर्षों तक जीवित रहे।

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पॉल अलेक्जेंडर को 70 साल तक इस मशीन में गुजारना पड़ा - फोटो : Adobe Stock
एक अद्भुत जिंदगी
हालांकि, पॉल ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी इस स्थिति को स्वीकार किया और जीवन को भरपूर जीया। उन्होंने पढ़ाई की, किताबें लिखी, दोस्त बनाए और समाज सेवा में भी सक्रिय रहे।
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आयरन लंग - फोटो : Adobe Stock
पॉल अलेक्जेंडर डर की कहानी एक प्रेरणा है। देखा जाए तो उन्होंने हमें सिखाया कि चाहे कितनी भी मुश्किल परिस्थितियां क्यों न हो, हमेशा आशा रखनी चाहिए और जीवन को जीना चाहिए। उन्होंने हमें यह भी सिखाया कि विकलांगता का मतलब यह नहीं है कि हम कुछ नहीं कर सकते।
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