ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमें बचाती है। अगर पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन परत न हो तो इस स्थिति में सूर्य की पराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुंच सकती हैं, जिससे इंसानों में त्वचा कैंसर, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा फसलों की पैदावार और समुद्री जीवन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। इसी वजह से कई लोग इसे पृथ्वी का सुरक्षा ढाल भी कहते हैं।
20वीं सदी की शुरुआत में रेफ्रिजरेटर, एसी समेत अन्य उत्पादों का बढ़चढ़कर इस्तेमाल किया जाने लगा था, जिसकी वजह से क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स जैसी रसायनिक गैसों से ओजोन परत को नुकसान पहुंच रहा था। इन रसायनों की वजह से अंटार्कटिका के ऊपर एक बड़ा होल बनने लगा। हालांकि, समय रहते दुनिया ने इस समस्या को पहचान लिया। इस बड़े खतरे को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए।