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अजब-गजब: गुरुत्वाकर्षण बल नहीं इस वजह से टिका है पूरा ब्रह्मांड, बेहद रोचक है इसके पीछे की वजह

Sun, 27 Feb 2022 10:54 AM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अंतरिक्ष का 95 फीसद हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से मिल कर बना है। बाकी का पांच प्रतिशत हिस्सा भौतिक पदार्थों से। इनमें ग्रह, नक्षत्र, तारे वे सभी आते हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी ही वह कड़ी है, जिसने इस पूरे ब्रह्मांड को एक सिलसिलेवार ढंग से बांध रखा है। डार्क मैटर ऐसे पदार्थों से मिल कर बने हैं जो प्रकाश को सोख, छोड़ और परावर्तित नहीं करते। इस कारण अब तक के साधनों के बल पर इसे देख पाना संभव नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
वैज्ञानिक परिकल्पना कहती है कि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी ही इस ब्रह्मांड का आधार हैं। इन्हीं पदार्थों से पूरे ब्रह्मांड का अस्तित्व बना है। इन पदार्थों की कोई विकसित समझ हमारे पास अब तक नहीं है। इसको समझ पाने का कोई ठोस आधार भी हमें अब तक नहीं मिला है। पर इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि इन पदार्थों का अस्तित्व नहीं होता। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
रिसर्च में यह पता चला है कि ग्रेविटेशनल बाइंडिंग एनर्जी जो कि ग्रहों, तारों और आकाशगंगा को स्थिर बनाये रखती है। अगर उसे कैलकुलेट किया जाए तो वह उतनी काफी नहीं होगी कि वह आकाशगंगा को थाम सके। खगोल वैज्ञानिकों को इस रिसर्च में पता चला कि ग्रेविटेशनल बाइंडिंग एनर्जी के साथ ब्रह्मांड में ग्रहों, तारों और आकाशगंगा का अन्तरजोड़ स्थापित नहीं हो सकता था। कुछ और ही अज्ञात चीज है जो इन्हें थाम रही है। वरना अब तक गुरुत्वाकर्षण कमजोर हो गया होता और सभी ग्रह, नक्षत्र तारे अपने परिक्रमा पथ से भटक गए होते। पर आज ये सभी स्थिर हैं। ऐसा क्यों है? ऐसा तभी हो सकता है जब इस ब्रह्मांड में हमारे द्वारा निरिक्षण किये गए द्रव्यमान से पांच गुना अधिक द्रव्यमान हो। यहीं से डार्क मैटर की अवधारणा सामने आई। डार्क मैटर ही वह मैटर है जो इस ब्रह्मांड को द्रव्यमान दे रहा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
येल विश्विद्यालय के प्रोफेसर पीटर डोककुम ने अपनी टीम के साथ ड्रैगन फ्लाई 44 नामक आकाशगंगा का अध्ययन किया। इसमें उन्होंने पाया कि एक बड़ी आकाशगंगा होने के बावजूद ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि इसमें कम तारे हों? कम तारों के साथ भी यह आकाशगंगा स्थिर थी। ये काफी चौकाने वाला विषय था, क्योंकि तारे कम होंगे तो आकाशगंगा के भीतर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव कम होगा। कम गुरुत्वाकर्षण के चलते तारे आकाशगंगा के भीतर टिक नहीं सकते। वह पथ से भटक जाएंगे और स्ट्रेंज स्टार्स की श्रेणी में आ जाएंगे। डोककुम और उसकी टीम ने यह अनुमान लगाया हो न हो कुछ ऐसा जरूर है जो इस आकाशगंगा को स्थिर रख रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
इस आकाशगंगा में तारों की मूवमेंट की जांच करने के लिए उनकी टीम ने टेलिस्कोप में डीप इमेजिंग मल्टी ऑब्जेक्ट स्पेक्टग्राफ तकनीक का सहारा लिया। जांच के जो परिणाम सामने आये वह वाकई चौकाने वाले थे। इस गैलेक्सी का लगभग 0.01 प्रतिशत भाग ही सामान्य पदार्थों से मिलकर बना था। बाकी 99.99 भाग डार्क मैटर ने घेर रखा था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
खगोलशास्त्रियों का मानना है कि डार्क मैटर नॉन ब्रायोनिक पदार्थो से बने होते हैं। ब्रायोनिक पदार्थ में इलेक्ट्रान, प्रोटोन, न्यूट्रॉन आते हैं। एक अर्थों में ब्रायोनिक पदार्थ वह पदार्थ हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं। वहीं दूसरी और नॉन ब्रायोनिक पदार्थ के विषय में हम कुछ भी नहीं जानते। इन्हीं नॉन ब्रायोनिक पदार्थों में एक पदार्थ आता है विंप पार्टिकल अर्थात वीकली इंट्रेक्टिंग मैसिव पार्टिकल। मान्यता है, विंप पार्टिकल से ही डार्क मैटर बनते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि डार्क मैटर आकाशगंगाओं का ऐसा समूह हैं, जहां पर भौतिकी के दूसरे नियम काम करते हैं। पर यह एक अनुमान है। इसमें कितनी हकीकत है और कितना फसाना यह कोई नहीं जानता। 
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