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इस मंदिर में नाग की परिक्रमा करने पहुंचते हैं चूहे

Tue, 16 Aug 2016 05:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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सांप और चूहों के बीच कभी दोस्ती नहीं हो सकती, इससे तो सभी भली भांति परिचित हैं। लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां चूहे सांप की परिक्रमा करने पहुंचते हैं। जानिए क्यों ये चूहे नाग की परिक्रमा करते हैं।

 
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मध्यप्रदेश के देवास जिले में राजा गंधर्वसेन ने एक विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। कहते हैं जब से यह मंदिर बना है तब से यहां चमत्कार ही हो रहे हैं।
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इस गंधर्वसेन मंदिर में रोजाना एक पीले रंग का नाग मंदिर के बीचों बीच विराजमान हो जाता है। जैसे ही ये नाग मंदिर में आता है। उसी समय दर्जनों चूहे नाग की परिक्रमा करने लगते हैं। इस स्थान को लोग चूहापाली भी कहते हैं, जो हजारों साल पुराना है।

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गांववालो के अनुसार आज तक नाग और चूहों को किसी ने अपनी आंखों से नहीं देखा। लेकिन जब भी मंदिर का दरवाजा खुलता है। तो परिक्रमा वाले स्थान पर सैंकड़ों चूहों का मल और नाग के विराजमान वाली जगह पर नाग का मल देखने को मिलता है।

 
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मंदिर के लोगों का कहना है कि परिक्रमा वाले स्थान की कई बार साफ सफाई की जाती है, लेकिन नाग और चूहों का मल कहां से आता है ये कोई नहीं जानता।
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कहते हैं कि ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर से घंटियों की आवाजें आती है। खासतौर पर पूर्णिमा और अमावस्या के दिन उसी दौरान मंदिर में पीले रंग का नाग भी आता है। यहां के लोग इस मंदिर को बड़ी ही श्रद्धा के साथ पूजते हैं। लेकिन ये कोई नहीं जानता की उस बात में कितनी सच्चाई है।
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