Monsoon 2026 El Nino: यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) ने जून 2026 में एक ताजा वेदर मॉडल अपडेट्स जारी किया है। इस वेदर मॉडल ने दुनियाभर को चौंका दिया है। इस अंतरराष्ट्रीय मॉडल के मुताबिक, प्रशांत महासागर में महा-विनाशकारी सुपर अल-नीनो का संकेत मिल रहा है। यह आधुनिक सैटेलाइट युग के इतिहास में अभी तक सबसे तीव्र और शक्तिशाली अल-नीनो साबित हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, नए अनुमानित अल-नीनो का ग्राफ ऐसे ऊपर जा रहा है कि यह पहले के सभी को रिकॉर्ड्स को तोड़ सकता है। वर्ष 2026 के बाद के महीनों तक प्रशांत महासागर सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस से लेकर 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकता है। इस डरावनी स्थिति की कल्पना अभी से पहले कभी नहीं की गई थी। अगर यह आने वाले महीने में सब साबित होते हैं, तो यह धरती के पर्यावरण, वैश्विक कृषि, खाद्य सुरक्षा और विशेष रूप से भारतीय मॉनसून के लिए एक विनाशकारी क्लाइमेट बम साबित होगा।
कब-कब अल नीनो ने मचाई तबाही?
अल नीनो के संभावित खतरे की गंभीरता का अंदाजा इतिहास में इसके कारण आई तबाही से लगाया जा सकता है। 1982-83 में अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य करीब 2.1 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था। इसके कारण पूरी दुनिया में सूखा और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इसके बाद 1997-98 में आए सुपर अल-नीनो को माना जाता है कि यह बीती सदी का सबसे खतरनाक बदलाव था। उस समय सामान्य से तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था। 2015-16 में आया अल नीनो आधुनिक दौर का सबसे तीव्र था। इसके कारण दुनियाभर में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया था और सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था।
वर्तमान अनुमान के मुताबिक, तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है या उससे भी ऊपर जा सकता है। सबसे डरावनी बात यह है कि पेरू और इक्वाडोर के तटीय इलाकों में पारा 5 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जाने के संकत मिल रहे हैं। इसके साफ है कि दुनिया एक ऐसे अनदेखे और अभूतपूर्व मौसम चक्र की तरफ बढ़ रही है, जिसका आधुनिक मानव इतिहास को अनुभव नहीं है।