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इस दुर्लभ जीव के लिए शख्स ने ठुकरा दिया 20 लाख का ऑफर, सोशल मीडिया पर हो रही तारीफें

Mon, 26 Aug 2019 10:26 AM IST
प्रशांत राय फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
एक वरिष्ठ पत्रकार और वन्यजीव कार्यकर्ता जयंत के दास ने हाल ही में एक लुप्त हो रहे टोके गेको को बचाया, जो सामान्य तौर पर असम और दूसरे पूर्वोत्तर राज्य में पाया जाता है। उन्होंने इस घटना के बारे में ट्वीट किया और साथ ही शिकारियों से बचने वाली छिपकली की तस्वीर भी साझा किया है। उन्होंने ट्वीट किया है कि सरीसृप को अवैध शिकारियों से लड़ने के बाद उनके चंगुल से छुड़ाया गया। साथ ही उन्होंने ट्वीट कर यह दावा किया है कि शिकारी उन्हें 20 लाख रुपये की घूस दे रहे थे, लेकिन वह उस जगह से भागने में सफल रहे। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
जयंत ने लिखा है कि उन्हें पैसे खोने का कोई पछतावा नहीं है बल्कि एक सरीसृप को बचाने पर गर्व महसूस हो रहा है। बता दें कि चीन और कोरिया के बाजारों में गेको के दाम बहुत ज्यादा हैं। क्योंकि उनका मानना है कि यह एचआईवी बीमारी ठीक कर सकता है। गेको की एक तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि मेरी हथेली पर सुंदर उंगलियां। अवैध शिकारियों से लड़ने के बाद इस लुप्तप्राय सरीसृप को बचाया। मैंने गेको को जंगल में छोड़ दिया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
जयंत ने कहा कि गेको असम और पूर्वोत्तर में पाए जाने वाले लुप्तप्राय टोके गेको की एक प्रजाति है। इन्हें करीब 14 करोड़ 45 लाख रुपये में खरीदे जाते हैं। ज्यादातर चीन, कोरिया के अरबपतियों द्वारा ये प्राणी खरीदे जाते हैं। ये लोग मानते हैं कि इसकी जीभ से बनी दवाई से एचआईवी ठीक हो सकती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
सोशल मीडिया पर जयंत दास की ट्वीट तेजी से वायरल हो गई। लोगों ने इस जीव की सुंदरता की बधाई की और जयंत दास के जानवरों के प्रति लगाव की भी तारीफ की। 
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- फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि गेको एक प्रकार की छिपकली है जो दुनिया भर में गर्म जलवायु में पाई जाती है। ये बड़े पैमाने पर एशिया में पाए जाते हैं और अपने औषधीय मूल्य के लिए जाने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सरीसृप अस्थमा, मधुमेह और त्वचा विकारों को ठीक करता है और अंतरराष्ट्रीय पालतू व्यापार बाजार में भी लोकप्रिय है। आजकल, पूर्वोत्तर में गेको ट्रेडिंग काफी आम हो गई है, इन्हें अक्सर म्यांमार ले जाया जाता है और फिर वहां से विभिन्न स्थानों पर भेजा जाता है। 
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