प्रतीकात्मक तस्वीर
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अपने इस बयान पर रितिका तर्क भी सामने रखती हैं। उनके मुताबिक एक लीटर दूध में नियमों के मुताबिक अगर पांच बच्चे को देना है, तो पानी मिला के आप 10 बच्चों को पिला दो। इसकी निगरानी कौन करेगा। अंडे में तो ये कर नहीं सकते। वो आगे कहतीं हैं, "पैसा बचाने के चक्कर में बच्चों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। दूध खराब होगा, तो बच्चे बीमार होंगे। दूध पाउडर भी दिया जाए, तो उसकी काला बाजारी होने की संभावना है। कर्नाटक में शिक्षक बताते हैं कि बच्चे इसका स्वाद पसंद नहीं करते।"
ऐसे में सवाल उठता है कि भारत के बाकी राज्यों में क्या हाल है? राइट टू फूड कैंपेन चलाने वाली संस्था ने इस पर डेटा निकाला है। आंगनबाड़ी में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और झारखंड में अंडा बच्चों को दिया जाता है। इनमें से ज्यादातर राज्य साल 2014 के बेस लाइन सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक मांसाहारी राज्य हैं।