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भगवान शिव को आखिर कैसे मिली थी तीसरी आंख? बड़ा गहरा है ये रहस्य

Tue, 02 Jul 2019 11:23 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य - फोटो : Social media
हम सभी जानते हैं कि देवों के देव महादेव के पास दो नहीं बल्कि तीन आंखें हैं। मान्यता के अनुसार, वह अपनी तीसरी आंख का प्रयोग तब करते हैं, जब सृस्टि का विनाश करना हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर भगवान शिव को तीसरी आंख कैसे मिली थी? इसका रहस्य बड़ा ही गहरा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File photo
महाभारत के छठे खंड के अनुशासन पर्व में बताया गया है कि आखिर शिवजी को तीसरी आंख कैसे मिली थी। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार नारद जी भगवान शिव और माता पार्वती के बीच हुए बातचीत को बताते हैं। इसी बातचीत में त्रिनेत्र का रहस्य छुपा हुआ है। 
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भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य - फोटो : Social media
नारद जी बताते हैं कि एक बार हिमालय पर भगवान शिव एक सभा कर रहे थे, जिसमें सभी देवता, ऋषि-मुनि और ज्ञानीजन शामिल थे। तभी सभा में माता पार्वती आईं और उन्होंने अपने मनोरंजन के लिए अपने दोनों हाथों से भगवान शिव की दोनों आंखों को ढक दिया। 

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भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य - फोटो : Social media
माता पार्वती ने जैसे ही भगवान शिव की आंखों को ढका, संसार में अंधेरा छा गया। ऐसा लगने लगा जैसे सूर्य देव का कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसके बाद धरती पर मौजूद सभी जीव-जंतुओं में खलबली मच गई। 
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भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य - फोटो : Social media
संसार की ये दशा भगवान शिव से देखी नहीं गई और उन्होंने अपने माथे पर एक ज्योतिपुंज प्रकट किया, जो भगवान शिव की तीसरी आंख बनी। बाद में माता पार्वती के पूछने पर भगवान शिव ने उनसे बताया कि अगर वो ऐसा नहीं करते तो संसार का नाश हो जाता, क्योंकि उनकी आंखें ही जगत की पालनहार हैं।   
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