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मान्यता: इस गुफा में आज भी मौजूद है भगवान गणेश का कटा हुआ सिर, यही छुपा है कलयुग के अंत का रहस्य

Wed, 06 Mar 2019 06:55 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Patal Bhuvneshwar Cave - फोटो : Social media
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को 'प्रथम पूज्य' देवता माना गया है। कोई भी मांगलिक कार्य, चाहे वह शादी हो या कोई और शुभ काम, गणेश जी की पूजा के बिना शुरू ही नहीं होता है। भगवान गणेश को गजानन के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उनका सिर हाथी का है जबकि शरीर एक इंसान की तरह है। अब ये तो आप जानते ही होंगे कि गणेश जी का सिर कटने के बाद उन्हें हाथी का मस्तक लगाया गया था, लेकिन क्या आपको ये पता है कि गणेश जी का असली मस्तक कहां है? 
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lord ganesha
आपको जानकर हैरानी होगी कि भगवान गणेश का असली सिर आज भी एक गुफा में मौजूद है। मान्यता है कि भगवान शिव ने गुस्से में आकर गणेश जी का जो मस्तक काट कर शरीर से अलग कर दिया था, उसे उन्होंने एक गुफा में रख दिया था। इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर के नाम से जाना जाता है। 
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Patal Bhuvneshwar Cave - फोटो : Social media
पाताल भुवनेश्वर में मौजूद गणेश जी की मूर्ति को आदि गणेश के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि कलयुग में इस गुफा की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी। यह गुफा उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

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Patal Bhuvneshwar Cave - फोटो : Social media
कहते हैं कि गणेश जी के इस कटे हुए सिर की रक्षा खुद भगवान शिव करते हैं। इस गुफा में भगवान गणेश के कटे शिलारूपी मूर्ति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला शवाष्टक दल ब्रह्मकमल के रूप की एक चट्टान है। इस ब्रह्मकमल से भगवान गणेश के शिलारूपी मस्तक पर दिव्य बूंद टपकती है। मुख्य बूंद आदि गणेश के मुख में गिरती हुई दिखाई देती है। मान्यता है कि यह ब्रह्मकमल भगवान शिव ने ही यहां स्थापित किया था। 
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Patal Bhuvneshwar Cave - फोटो : Social media
इस गुफा में चारों युगों के प्रतीक रूप में चार पत्थर स्थापित हैं। कहा जाता है कि इनमें से एक पत्थर जिसे कलयुग का प्रतीक माना जाता है, वह धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है। यह माना जाता है कि जिस दिन यह कलयुग का प्रतीक पत्थर दीवार से टकरा जायेगा, उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा। 
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Patal Bhuvneshwar Cave - फोटो : Social media
इस गुफा के अंदर केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं। बाबा अमरनाथ की गुफा के पास पत्थर की बड़ी-बड़ी जटाएं फैली हुई हैं। इसी गुफा में कालभैरव की जीभ के भी दर्शन होते हैं। इसके बारे में मान्यता है कि अगर इंसान कालभैरव के मुंह से गर्भ में प्रवेश कर पूंछ तक पहुंच जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। 
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