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La Nina: क्या होता है ला नीना? जिससे डरी दुनिया, जानिए भारत पर क्या होगा असर

Fri, 13 Dec 2024 07:15 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

 La Nina: विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा है कि आने वाले तीने महीनों में ला नीना आ सकता है, लेकिन इसके सिर्फ 55 फीसदी होने की संभावना है। अगर ऐसा हुआ, तो यह अपेक्षाकृत कमजोर और सिर्फ कुछ समय के लिए होगा।
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क्या होता है ला नीना? जिससे डरी दुनिया - फोटो : Adobe Stock
La Nina: अल नीनो और ला नीना का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। अब विश्व मौसम विज्ञान संगठन ला नीना को लेकर एक बड़ी जानकारी दी है, जिससे दुनिया की चिंता बढ़ गई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा है कि आने वाले तीने महीनों में ला नीना आ सकता है, लेकिन इसके सिर्फ 55 फीसदी होने की संभावना है। अगर ऐसा हुआ, तो यह अपेक्षाकृत कमजोर और सिर्फ कुछ समय के लिए होगा। ला नीना से समुद्र की सतह का तापमान ठंडा होता है।

इससे अधिक ठंड पड़ती है और ज्यादा गर्मी की संभावनाएं कम होती हैं। लेकिन ला नीना के कमजोर पड़ने से आशंका जताई जा रही है कि इस साल ठंड कम पड़ेगी और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ सकती है। ला नीना प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्य रेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान के बड़े पैमाने पर ठंडे होने को दर्शाता है। इसके साथ ही हवा, दबाव और बारिश में बदलाव नजर आता है। अल नीनो इसके उलट है। इसकी वजह से समुद्र गर्म होता है। 
 
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क्या होता है ला नीना? जिससे डरी दुनिया - फोटो : Adobe Stock
भारत में अल नीनो के असर का कारण गर्मी ज्यादा पड़ती है और बारिश कम होती है। लाल नीना से मानसून मजबूत होता है और औसत से अधिक बारिश होती है। सर्दियों में ठंड बढ़ती है। हालांकि, विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ला नीना और अल नीनो जैसी प्राकृतिक जलवायु घटनाएं मानवजनित जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रही हैं। 
 
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क्या होता है ला नीना? जिससे डरी दुनिया - फोटो : Adobe Stock
इंसानों द्वारा किए गए बदलाव के कारण दुनिया का तापमान बढ़ रहा है। इससे मौसमी बारिश और तापमान के पैटर्न में बदलवा हो रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव सेलेस्ट साउलो ने बताया कि अल नीनो के साथ साल 2024 की शुरुआत हुई और यह अभी तक का सबसे गर्म साल होने की तरफ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि भले ही ला नीना विकसित हो, इसका अल्पालिक ठंडा प्रभाव वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के कारण होने वाली गर्मी को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

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क्या होता है ला नीना? जिससे डरी दुनिया - फोटो : Adobe Stock
सेलेस्ट साउलो ने बताया कि मई से अल नीनो या ला नीना के नहीं होने के बाद भी असामान्य मौसम देखा गया। इसमें लोगों को रिकॉर्ड तोड़ बारिश और बाढ़ का सामना करना पड़ा। इस तरह की घटनाएं बदलती जलवायु में सामान्य हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से महासागर में ठंडक लाने में कठिनाई हो रही है। 

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क्या होता है ला नीना? जिससे डरी दुनिया - फोटो : Adobe Stock
क्या है ला-नीना?

दरअसल प्रशांत महासागर में होने वाले एक मौसमी पैटर्न को ला नीना कहा जाता है। इस दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान औसत से अधिक ठंडा हो जाता है। ला नीना के कमजोर पड़ने पर भीषण गर्मी पड़ती है। ला नीना स्पेनी भाषा का शब्द है। इसका मतलब होता है छोटी लड़की।' ला नीना, अल नीनो के विपरित होता है। 

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भारत पर क्या पड़ेगा असर?

ला नीना के कमजोर पड़ने पर जो देश प्रभावित होंगे, उनमें भारत भी शामिल है। भारत भूमध्य रेखा के पास स्थित है। ला नीना के कमजोर होने से भारत में ज्यादा गर्मी पड़ेगी और बारिश कम होगी।  भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून में आमतौर पर ला नीना के कारण ज्यादा बारिश होती है। 
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