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भारत में इस जगह आज भी चलती है ब्रिटिश सरकार की हुकूमत, कुछ भी करने से पहले लेनी पड़ती है इजाजत

Thu, 18 Jul 2019 02:11 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोहिमा युद्ध स्मारक - फोटो : Social media
15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हो गया था। यानी भारत को अंग्रेजों से मुक्ति मिल गई थी। तब से देश के हर कोने-कोने पर भारत सरकार का राज है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ही एक ऐसी भी जगह है, जहां आज भी ब्रिटिश सरकार की ही हुकूमत चलती है। यहां कुछ भी करने से पहले भारत को ब्रिटिश सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है। 
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कोहिमा युद्ध स्मारक - फोटो : Social media
अब आप सोच रहे होंगे कि हम ब्रिटिश दूतावास की बात रहे हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून के चलते कुछ भी करने के लिए ब्रिटिश सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है। जी नहीं, हम बात कर रहे हैं उस जगह की, जो भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में होते हुए भी नहीं है। 
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कोहिमा युद्ध स्मारक - फोटो : Social media
ये जगह है नागालैंड की राजधानी कोहिमा में, जिसे पूरी दुनिया 'कोहिमा वॉर सिमेट्री' यानी कोहिमा युद्ध स्मारक के नाम से जानती है। यहां दूसरे विश्वयुद्ध में शहीद हुए 2700 ब्रिटिश सैनिकों की कब्र है। यहीं पर चिंडविन नदी के किनारे जापान की सेना ने आजाद हिंद फौज के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार पर हमला किया था, जिसे इतिहास में कोहिमा युद्ध के नाम से जाना जाता है। 

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कोहिमा युद्ध स्मारक - फोटो : Social media
ब्रिटिश सरकार ने अपने सैनिकों की याद में इस जगह पर स्मारक बनवाया था। चूंकि उस समय दुनिया के अधिकतर राज्यों में ब्रिटेन की हुकूमत थी, इसलिए ऐसे कई स्मारक भारत के अलावा दूसरे देशों जैसे, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी बनवाये गए हैं।  
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कोहिमा युद्ध स्मारक - फोटो : Social media
यहां मौजूद सभी स्मारकों (कब्रगाहों) की देख-रेख का काम कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन के जिम्मे है। इसलिए ऐसी जगहों पर भारतीयों को फोटो खींचने से लेकर रख-रखाव के काम तक को करने के लिए भी ब्रिटिश सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। 
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कोहिमा युद्ध स्मारक - फोटो : Social media
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल इस स्मारक के पास की सड़क को चौड़ा करने का प्रस्ताव भारत की ओर से दिया गया था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उसे खारिज कर दिया था। 
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कोहिमा युद्ध स्मारक - फोटो : Social media
हालांकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस संस्था के पदाधिकारी तमाल सान्याल इस जगह को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने के लिए भारत सरकार से बात कर रहे हैं। 
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