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आखिर हम प्यार में क्यों पड़ते हैं? जानिए वैज्ञानिक वजह

Sat, 13 Feb 2021 07:11 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फरवरी का महीना आते ही दुनियाभर में वैलेंटाइन डे के साथ प्यार को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। प्रेम को लेकर कई लोग का तो ये भी मानना है कि विज्ञान में इसके लिए कोई जगह नहीं हैं या यूं कहें तो प्रेम विज्ञान के लिए बना ही नहीं है। लेकिन इन सब के बावजूद भी वैज्ञानिकों ने अपने शोध में प्रेम विषय को अनछुआ नहीं रखा है। तो आइए जानते हैं विज्ञान प्यार को पहली नजर में किस नजरिए से देखता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तीन रसायनों की भूमिका
इस विश्लेषण में उन्होंने समय के साथ होने वाले बदालव को भी शामिल किया है। वैज्ञानिकों की मानें तो प्रेम की शुरुआत में प्रेरित करने के लिए तीन रसायनों की भूमिका अहम होती है। नोराड्रेनालाइन, डोपामाइन और फेनाइलइथाइलामाइन ये तीन ऐसे रसायन हैं, जो हमारे दिमाग में प्रेम के प्रति भावों को सक्रिय करने में मदद करते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कैसे होता है असर
नोराड्रेनालाइन रसायन का काम शुरुआत करने यानी शुरुआती भावों को उकसाने में भूमिका निभाते हैं। इसके वजह से एड्रेनालाइन बनने लगता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इस दौरान हथेली पर पसीना आने जैसे लक्षण भी दिखने लगते हैं। इसके बाद दूसरा रसायन डोपामाइन के पैदा होने से व्यक्ति अच्छा महसूस करने लगता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तीसरे रसायन फेनाइलइथाइलामाइन के रिलीज होने पर व्यक्ति को अजीब सा महसूस होने लगता है। वैज्ञानिको ने प्रेम में होने की स्थिति को तीन चरणों में बांटा है। पहला है आसक्ति, जिसे अंग्रेजी में लस्ट कहते हैं, जो पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में ओस्ट्रोजन के स्तरों से संचालित होते हैं। दूसरा है आकर्षण यह बिलकुल उसी तरह के भाव पैदा करती है, जब किसी नशा करने वाला व्यक्ति तो शराब या ड्रग्स की तलब लगती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अंतिम चरण में इंसान को लगाव हो जाता है। जब व्यक्ति प्रेम करने वाले से नजदीकी से जुड़ता है और उसके साथ मिलकर लंबी योजनाएं बनाने लगता है, तो उस समय यह अंतिम चरण काम करने लगता है। आसक्ति के स्थिति में शरीर टेस्टोस्टेरोन या ओस्ट्रेजन का बढ़ना पृथ्वी के दूसरे स्तनपायी जीवों की तरह ही होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
किसी इंसान के अंदर जब बहुत अधिक खुशी के भाव पैदा होते हैं, तो दिमाग में कई कैमिकल्स पैदा होते हैं। इन कैमिकल्स में खुशियों का अहसास कराने वाला डोपामाइन, लड़ो या बच निकलो वाला भाव पैदा करने वाला एड्रेनालाइन और चौकन्ना होने का भाव पैदा करने वालारोरेपाइनफ्रराइन इंसान में लत की तरह का प्रेम का भाव पैदा करते हैं। एड्रेनालाइन की वजह से हथेलियों में पसीना, दिल की धड़कन बढ़ना और शर्म से गाल लाल होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बहुत कम लोग जानते हैं हम खास तरह की गंध निकालते हैं। हारमोने की तरह फेरोमोन्स भी रसायन ही होते हैं, जो हमारे शरीर के बाहर पसीने और शरीर के द्रव्यों में रहते हैं। वैज्ञानिक तौर पर पाया गया है कि ये अवचेतन के स्तर पर शुरुआती आकर्षण की वजह बनते हैं। इसके अलावा एक जैसे दिखना, समान मूल्य और विश्वास भी आकर्षण का कारण होते हैं।
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