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Mirror Discovery: दुनिया ने कब सीखा आईने में चेहरा देखना? जानिए कैसे हुई थी इसकी खोज

Fri, 29 Apr 2022 11:48 AM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा? (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
Mirror Discovery: घर से बाहर निकलते समय, बाल बनाते समय, खुद पर कुछ नया ट्राई करते समय या खुद को पैंपर करते समय, हम दिन में न जाने कितनी बार आईने में खुद को देखते हैं। ये हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन गया है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर इसका आविष्कार किसने किया और पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा? अगर नहीं जानते तो आज हम आपको आईने के बारे में कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं।

अभी तक बताया जाता था कि शीशे का आविष्कार 1835 में हुआ था। जब जर्मन रसायन विज्ञानी जस्टस वॉन लिबिग (Justus von Liebig) ने कांच के एक फलक की सतह पर मैटेलिक सिल्वर की पतली परत लगाकर इसका इजाद किया था। हालांकि, इससे पहले शीशा प्रचलन में नहीं था। मुख्यतौर पर गरीब तबके के लोगों के पास शीशे होते ही नहीं थे। ऐसे में लोग पानी में ही अपना अक्स देखा करते थे। उस समय घर में शीशे का होना भी लग्जीरियस होता था।   
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पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा? (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
बात की जाए 1835 की, तो शुरुआती दौर के आईने जो बेहद दुर्लभ थे, ये दर्पण पॉलिश किए गए ओब्सीडियन से बने होते थे। जानकारी के अनुसार, इस तरह के दर्पण का इस्तेमाल आज से करीब 8,000 साल पहले एनाटोलिया (Anatolia) में किया जाता था, जिसे अब तुर्की के नाम से जाना जाता है। साथ ही प्राचीन मेक्सिको के लोग भी इसी तरह के शीशे का इस्तेमाल करते थे। रोचक बात ये है कि उस दौर में आईनों को जादुई उपकरण माना जाता था, जिसके जरिए देवताओं और उनके पूर्वजों की दुनिया को भी देखा जा सकता था।
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पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा? (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
वहीं 4000 से 3000 ईसा पूर्व तांबे को पॉलिश करके बनाए गए शीशे मिस्र और मेसोपोटामिया (जिसे अब इराक कहा जाता है) में बनाए गए थे। वहीं दक्षिण अमेरिका में इसके करीब 1,000 साल बाद, पॉलिश किए गए पत्थर से शीशे बनाए गए थे।  

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पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा? (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
रोमन लेखक प्लिनी द एल्डर (Pliny the Elder) ने पहली शताब्दी ईस्वी में कांच के दर्पण का ज़िक्र किया था। लेकिन बताया जाता है कि उनमें आजकल के शीशों की तरह दर्पणों का प्रतिबिंब नहीं दिखता था। साथ ही वे आकार में बहुत छोटे भी हुआ करते थे। 
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पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा? (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
जिस तरह आज हम शीशे में साफ चेहरा देख पाते हैं। ऐसा साफ चेहरा देख पाने के लिए लोगों को 1835 तक का इंतजार करना पड़ा। हालांकि, लोग इससे भी बेहद खुश नहीं थे। 
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Mirror - फोटो : istock
पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा?
अब बात करें आईने को देखने वाले पहले व्यक्ति की तो बता दें कि तेबिली (Tebele) पहला शख्स था, जिसने आईने को बड़े मोह से देखा। इसके बाद उसके कबीले के सरदार- पुया (Puya) ने इसे खुद देखना चाहा। खुद की छवि आईने में देखकर वो उछल पड़ा। इसके बाद उसने तेबिली को आईना पकड़ा दिया और अलग-अलग एंगल से दूर पास जाकर अपना प्रतिबिंब देखने लगा। 
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पहली बार शीशे में अपना चेहरा किसने देखा? (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
आपको जानकर हैरानी होगी कि पुया ने इसे मनुष्यों के लिए बहुत खतरनाक बताकर वापस करने के लिए कह दिया था। ये जैक हाइड्स को अपमानजनक लगा। पुया को आईना कोई जादुई चीज लग रही थी, जबकि जैक हाइड्स का मानना था कि पुया एक जादूगर था और वह अपनी शक्तियों से कबीले के सदस्यों को वश में कर रहा था। 
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