फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाकिस्तान के इस मंदिर में बिना भारतीयों के मनी महाशिवरात्रि, पहली बार यहां नहीं गया एक भी हिंदू

Mon, 04 Mar 2019 12:04 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
Katasraj mandir - फोटो : Wikipedia
पाकिस्तान के लाहौर से 280 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर बने भगवान शिव के कटासराज मंदिर में आज महाशिवरात्रि पर भारत का कोई श्रद्धालु दर्शन करने नहीं पहुंचेगा। भगवान शिव का 1000 साल से ज्यादा पुराना कटासराज मंदिर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चकवाल जिले में स्थित है। 
विज्ञापन

2 of 8
Katas Raj Temple - फोटो : twitter
ऐसा इसलिए हुआ कि क्योंकि, पुलवामा हमले के बाद बने तनाव की वजह से श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान का वीजा नहीं लिया है। इससे पहले ऐसा 1999 के करगिल युद्ध और 2008 के मुंबई हमले के बाद हुआ था। हालांकि, 1000 साल से ज्यादा पुराने मंदिर को महशिवरात्रि के लिए साफ किया गया है। 150 फीट लंबे और 90 फीट चौड़े पवित्र सरोवर का पानी शीशे की तरह साफ दिख रहा है। 
विज्ञापन

3 of 8
- फोटो : Social Media
कुछ समय पहले तक इसके पास लगी सीमेंट की फैक्ट्रियां बोरवेल से पानी निकाल रही थीं, जिससे जमीनी पानी का स्तर घटा और सरोवर सूखने की कगार पर पहुंच गया। फिर सिंध के हिंदुओं की याचिका पर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने सरोवर को ठीक करने के आदेश दिए।

4 of 8
- फोटो : twitter
फैक्ट्रियों पर 10 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था। साथ ही फैक्ट्रियों को वहां से हटाने के विकल्प पर भी विचार करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पाक सरकार मंदिर को यूनेस्को की हैरिटेज लिस्ट में लाने के प्रयास कर रही है।
विज्ञापन

5 of 8
- फोटो : twitter
36 साल से भारतीय जत्था कटासराज मंदिर लेकर जाने वाले सनातन धर्म सभा के संयोजक शिवप्रताप बजाज ने बताया कि भारत के 141 श्रद्धालुओं ने कटासराज जाने के लिए वीजा  की अर्जी लगाई थी। लेकिन, पुलवामा हमले के बाद हमने वहां नहीं जाने का फैसला किया है।
विज्ञापन

6 of 8
- फोटो : twitter
बताया जा रहा है कि सिंध के कुछ हिंदू परिवार इस बार हमारी ओर से भी भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। इंडो-पाक प्रोटोकॉल 1972 के अनुसार हर साल 200 भारतीय कटासराज जा सकते हैं।
विज्ञापन

7 of 8
- फोटो : twitter
इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी से नवीं शताब्दी के मध्य करवाया गया था। कहा जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल (त्रेतायुग) में भी था। इस मंदिर से जुड़ी पांडवों की कई कथाएं प्रसिद्ध हैं। यह भी मान्यता है कि पांडवों ने वनवास के समय यहां कुछ समय बिताया था।
विज्ञापन

8 of 8
- फोटो : twitter
मान्यताओं के अनुसार, कटासराज मंदिर का कटाक्ष कुंड भगवान शिव के आंसुओं से बना है। कटासराज मंदिर के कटाक्ष कुंड के निर्माण के पीछे एक कथा है। कहा जाता है कि जब देवी सती की मृत्यु हो गई, तब भगवान शिव उन के दुःख में इतना रोए कि उनके आंसुओं से एक नदी बन गई। जिससे दो कुंड बन गए। जिसमें से एक कुंड राजस्थान के पुष्कर नामक तीर्थ पर है और दूसरा यहां कटासराज मंदिर में। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें