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छह माह तक कर्नाटक का यह गांव होता है इन पक्षियों का मायका, बेटियों की तरह ख्याल रखते हैं लोग

Mon, 23 Dec 2019 04:29 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रवासी पक्षी - फोटो : Pixabay
बेंगलुरु के मांडया जिले का कोक्केरबेल्लुर गांव इस समय बहुत व्यस्त है। फिलहाल पुरा गांव अपनी बेटियों और नाती-नातिनों की देखभाल कर रहा है। ऐसे में आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि पूरा गांव की बेटियां एक साथ कैसे आ सकती हैं? बता दें कि यह गांव प्रवासी पक्षियों को अपनी बेटी की तरह मानता है। जिस तरह परंपरा के अनुसार बेटियां बच्चे के जन्म के लिए मायके आती हैं ठीक उसी तरह पेलिकन और पेंटेड स्टॉर्क  जैसी प्रवासी पक्षी यहां आते हैं।
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प्रवासी पक्षी - फोटो : Pixabay
कोक्केरबेल्लुर में पेलिकन पक्षी अक्टूबर में ही आ गई हैं। करीब छह माह बाद यानी अप्रैल तक जब इनके बच्चे उड़ना और भोजन जुटाना सीख जाएंगे तो यह पक्षी वापस लौट जाएंगे। ठीक इसी प्रकार प्रवासी पक्षी पेंटेड स्टॉर्क भी दिसंबर से जुलाई तक यहां रहेंगे। पक्षियों और गांव वालों के बीच यह अनोखा रिश्ता करीब 200 साल और चार पीढ़ी से बना हुआ है। ये प्रवासी पक्षी धान की घास से घोंसला बनाते हैं, इसलिए गांव के लोग इन पक्षियों को रहने के लिए धान की घास अपनी छतों पर बिछा देते हैं।
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प्रवासी पक्षी - फोटो : Pixabay
यही नहीं कोक्केरबेल्लुर गांव के लोग इन फक्षियों को शुभ मानते हुए शादी से पहले यह जरूर देखते हैं कि जिस घर में उनके बच्चों का रिश्ता जुड़ रहा है, वहां घोंसला है या नहीं। प्रवासी पक्षियों और इनके बच्चों को रहने के लिए प्रशासन और गांव के लोग विशेष इंतजाम करते हैं। पेड़ से गिरकर इनके बच्चे घायल न हों, इसलिए पेड़ों के आसपास नेट लगाए गए हैं। कुछ साल पहले करंट से कई पक्षियों की मौत हो गई थी, इसलिए अब सभी बिजली के तारों को कवर कर दिया गया है।

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प्रवासी पक्षी - फोटो : Pixabay
जिस पेड़ पर इन पक्षी के बच्चे रहते हैं, उसके नीचे नीचे पशु बांधे जाते हैं, ताकि कोई जानवर पेड़ पर चढ़कर अंडों को नुकसान न पहुंचा सके। ये प्रवासी पक्षी भी गांव के लोगों के साथ रिश्ते को बखूबी निभाते हैं। बता दें कि यह गांव कुछ समय पहले एक किलाेमीटर दूर सिमसा नदी के तट पर था, लेकिन प्लेग की वजह से गांव ने अपना जगह बदल लिया। पक्षी भी गांव वालों के नए जगह पर आकर रहने लगी। बता दें कि पक्षियों का मुख्य भोजन मछली है, जिसके लिए अब उन्हें नदी तट तक उड़कर जाना पड़ता है।
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प्रवासी पक्षी - फोटो : Pixabay
कोक्केरबेल्लुर गांव कर्नाटक का एकमात्र क्कम्युनिटी रिजर्व है। इस गांव में आने वाले प्रवासी पक्षी भारत के अलावा ये श्रीलंका, कंबोडिया और थाईलैंड में पाए जाते हैं। जनवरी 2020 से इन पक्षियों की जीपीएस टैंगिंग होने जा रही है।
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