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Cloud Fun Facts: लाखों टन वजन लेकर भी आसमान में टिके रहते हैं बादल, जानें इसके पीछे का विज्ञान

Tue, 21 Apr 2026 03:46 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

How Do Clouds Stay In The Air: हमारे सिर के ऊपर मंडराता एक साधारण-सा बादल भी लाखों टन वजनी हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद ये बादल आखिर गिरते क्यों नहीं? इसका जवाब बादलों की बनावट और प्रकृति में छिपा है, आइए विस्तार से जानते हैं।
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Clouds - फोटो : AI
Interesting Facts About Clouds: नीले आकाश में तैरते सफेद बादल अक्सर हमें हल्के, मुलायम और बहुत कोमल से सपने जैसे लगते हैं। उन्हें देखकर ऐसा एहसास होता है जैसे आसमान में रुई के फाहे बिखरे हों, जिनका धरती की सख्ती से कोई लेना-देना नहीं। लेकिन जो चीज आंखों को इतनी हल्की दिखती है, उसके पीछे छिपा सच बेहद हैरान करने वाला है। विज्ञान के अनुसार, हमारे सिर के ऊपर मंडराता एक साधारण-सा बादल भी लाखों टन वजनी हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतना भारी होने के बावजूद ये बादल आखिर गिरते क्यों नहीं? इसका जवाब बादलों की बनावट और प्रकृति में छिपा है, आइए विस्तार से जानते हैं।
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बादल cloud rain - फोटो : Adobe Stock
बादल असंख्य सूक्ष्म जल-बूंदों या बर्फ के कणों से मिलकर बनते हैं। हर बूंद अपने आप में बेहद हल्की होती है, लेकिन जब ऐसी अनगिनत बूंदें एक साथ इकट्ठा होती हैं, तो उनका कुल वजन चौंकाने वाला हो जाता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एक सामान्य क्यूम्यलस (Cumulus) बादल का वजन करीब 10 लाख टन तक हो सकता है। यह वजन कई बड़े जहाजों या सैकड़ों हवाई जहाजों के बराबर बैठता है।
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Clouds - फोटो : AI
आसमान में इतने भारी बादल कैसे टिके रहते हैं? 
इसका रहस्य ‘घनत्व’ यानी डेंसिटी में छिपा है। बादल में मौजूद पानी बहुत बड़े क्षेत्र में फैला रहता है, जिससे उसका औसत घनत्व आसपास की हवा की तुलना में कम हो जाता है। यही वजह है कि बादल हवा में तैरते रहते हैं। इसे ऐसे समझ सकते हैं जैसे एक विशाल जहाज पानी पर इसलिए तैरता है क्योंकि उसका औसत घनत्व पानी से कम होता है, भले ही उसका कुल वजन कितना भी अधिक क्यों न हो।

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Cloud Brust - फोटो : AdobeStock
गर्म हवा की भूमिका
इसके अलावा धरती से उठने वाली गर्म हवा भी इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है। इस गर्म और हल्की हवा को ‘अपड्राफ्ट’ कहा जाता है, जो लगातार ऊपर की ओर बहती रहती है। यह हवा बादलों की सूक्ष्म बूंदों को सहारा देती है और उन्हें नीचे गिरने से रोकती है। यानी बादल सिर्फ अपने हल्के घनत्व के कारण ही नहीं, बल्कि इस ऊपर उठती हवा के समर्थन से भी आसमान में टिके रहते हैं।
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Clouds - फोटो : AI
हालांकि यह संतुलन हमेशा कायम नहीं रहता। जब बादलों के भीतर मौजूद छोटी-छोटी बूंदें आपस में मिलकर बड़ी और भारी होने लगती हैं, तब हवा का सहारा कमजोर पड़ जाता है। उस समय गुरुत्वाकर्षण अपना असर दिखाता है और ये बूंदें बारिश बनकर धरती पर गिरने लगती हैं। 

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