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Queen of Language: भारत की ये भाषा है क्वीन ऑफ लैंग्वेज, एआई के क्षेत्र में भी है बड़ी अहमियत

Tue, 12 May 2026 01:47 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Queen Of All Languages: दुनिया भर के विद्वान जिस भाषा को “क्वीन ऑफ लैंग्वेज” कहते हैं, वह है संस्कृत, एक ऐसी भाषा जो ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का अनोखा संगम मानी जाती है।
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क्वीन ऑफ लैंग्वेज - फोटो : AI
Queen Of All Languages: आज की भागदौड़ भरी दुनिया में जहां करियर के नाम पर लोग विदेशी भाषाओं की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, वहीं एक ऐसी भाषा भी है जो हजारों साल पुरानी होकर भी आज के दौर में उतनी ही प्रासंगिक है। यह सिर्फ अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का भी दरवाजा खोलती है। दुनिया भर के विद्वान जिस भाषा को “क्वीन ऑफ लैंग्वेज” कहते हैं, वह है संस्कृत, एक ऐसी भाषा जो ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का अनोखा संगम मानी जाती है।

क्यों कहलाती है संस्कृत ‘भाषाओं की रानी’?
संस्कृत को यह सम्मान यूं ही नहीं मिला। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका बेहद सटीक और वैज्ञानिक व्याकरण है। भाषा विशेषज्ञों के अनुसार, संस्कृत का हर शब्द और उसका उच्चारण एक निश्चित नियम के तहत चलता है, जिससे यह दुनिया की सबसे व्यवस्थित भाषाओं में गिनी जाती है।
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क्वीन ऑफ लैंग्वेज - फोटो : adobe stock
संस्कृत को व्यवस्थित रूप देने का श्रेय 'पाणिनि' को जाता है। उनकी रचना ‘अष्टाध्यायी’ को आज भी भाषा विज्ञान का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि उनके बनाए नियम आधुनिक कंप्यूटर भाषाओं और प्रोग्रामिंग सिस्टम से मेल खाते नजर आते हैं।
 
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सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं - फोटो : adobe stock
सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं
अक्सर संस्कृत को केवल धार्मिक भाषा समझ लिया जाता है, लेकिन इसका दायरा इससे कहीं बड़ा है। आयुर्वेद, योग, गणित, खगोल विज्ञान और दर्शन जैसे विषयों के मूल ग्रंथ इसी भाषा में लिखे गए थे। प्राचीन भारत का वैज्ञानिक और चिकित्सा ज्ञान भी काफी हद तक संस्कृत पर आधारित रहा है। यानी यह भाषा केवल संस्कृति नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान की मजबूत नींव भी है।
 

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AI और टेक्नोलॉजी में भी उपयोगी - फोटो : अमर उजाला
AI और टेक्नोलॉजी में भी उपयोगी
आज के डिजिटल युग में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है, तब भी संस्कृत की अहमियत कम नहीं हुई है। इसकी स्पष्ट और नियमबद्ध संरचना के कारण कई वैज्ञानिक इसे कंप्यूटर के लिए उपयोगी भाषा मानते हैं। कुछ शोधों में यह भी सामने आया है कि संस्कृत की बनावट मशीनों को सटीक निर्देश देने में मददगार हो सकती है। यही वजह है कि दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में संस्कृत पर रिसर्च और पढ़ाई तेजी से बढ़ रही है।
 
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नई पीढ़ी के लिए क्यों जरूरी? - फोटो : adobe stock
नई पीढ़ी के लिए क्यों जरूरी?
तेजी से बदलती दुनिया में लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में संस्कृत केवल इतिहास नहीं सिखाती, बल्कि सोचने का एक व्यवस्थित और तार्किक तरीका भी देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत सीखने से याददाश्त बेहतर होती है, उच्चारण सुधरता है और विश्लेषण करने की क्षमता मजबूत होती है। इसी कारण आज फिर से स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में संस्कृत को महत्व दिया जा रहा है, सिर्फ एक भाषा के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत के रूप में जो अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ती है।

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