'की कोड” खो जाए तो क्या होगा?
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'की कोड” खो जाए तो क्या होगा?
लेकिन अगर यह टैग आपके पास नहीं है, तो परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में डीलर को पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, चाबी का माप लेना, सिस्टम से कोड निकालना और कई बार इमोबिलाइजर चिप को रीप्रोग्राम करना। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं, जबकि की कोड होने पर काम काफी सस्ता और आसान हो जाता है।