हीरों को अब विज्ञान की प्रयोगशालाओं के भीतर भी बनाया जा सकता है। लंबे समय से हीरों को खनन द्वारा पृथ्वी के गर्भ से बाहर निकाला जाता था। निरंतर हो रही वैज्ञानिक उन्नति के चलते अब इस काम को लैब के भीतर भी अंजाम दिया जाने लगा है। रासायनिक रूप से हीरे शुद्ध कार्बन के बने होते हैं। अगर इसे काफी ज्यादा तापमान पर गर्म किया जाए तो ये कार्बन डाइऑक्साइड बन जाएगा। हीरा काफी दुर्लभ पदार्थ है। इसी वजह से इनकी कीमत काफी महंगी होती है। आपको जानकर आश्चर्य होगा विश्व भर में डायमंड इंडस्ट्री का मार्केट कैप करीबन 80 बिलियन डॉलर का है। हीरों को खनन द्वारा निकालने में काफी मेहनत लगती है। इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में पानी की बर्बादी होती है। इसके अलावा जहां पर हीरों का खनन किया जाता है वहां पर हजारों-हजार पेड़ों को काट दिया जाता है। खनन के दौरान मजदूरों को बेहद ही खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऐसे में प्रयोगशाला में बने हीरे आने वाले दौर में गेम चेंजिंग चीज साबित हो सकती है।
विज्ञापन
2 of 5
हीरा
- फोटो : pixabay
पृथ्वी के गर्भ में जब तापमान काफी गर्म होता है, उस वक्त कार्बन के एटम आपस में जुड़ने लगते हैं और हीरा बनकर तैयार होने लगता है। इसी प्रविधि को अमल में लाकर अब हीरों को प्रयोगशालाओं में तैयार किया जा रहा है। प्रयोगशाला में हीरे को बनाने के लिए एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
3 of 5
हीरा
- फोटो : pixabay
इसमें हाइड्रोकार्बन गैस के मिश्रण को 800 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है। इस कारण कार्बन के एटम टूटने लगते हैं और परत दर परत हीरे के आकार की खोल में जमा होने लगते हैं और एक क्रिस्टल के रूप में बदल जाते हैं। इस प्रकार प्रयोगशाला के भीतर हीरा बन कर तैयार होता है।
4 of 5
हीरा
- फोटो : pixabay
आपको जानकर आश्चर्य होगा लेकिन हीरों को इंसान और जानवरों के शरीर से भी बनाया जा सकता है। हमारे शरीर की संरचना में कार्बन के एटम का बहुत बड़ा योगदान है। अगर कार्बन नहीं होता तो पृथ्वी पर जीवन भी संभव नहीं हो पाता। इसी वजह से कार्बन को जीवन का मूलाधार माना जाता है। अगर किसी मृत जानवर या इंसान के शरीर से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को निकाल दिया जाए तो शरीर के टिशू के अंदर शुद्ध रूप में कार्बन बचेगा।
बाद में इन टिशू को प्रयोगशालाओं में उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है। इसके बाद उस पर खूब दबाव डाला जाता है, तत्पश्चात शरीर के ऊतकों से हीरा बनकर तैयार होता है। दुनिया में कई बड़ी कंपनियां हैं जो इंसान और जानवरों के अवशेषों को हीरे में बदलने का काम करती हैं। इस प्रक्रिया में काफी ज्यादा खर्चा आता है। वहीं पारंपरिक रूप से हीरों को खनन करके निकालने से जलवायु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस कारण कई बड़ी कंपनियां अब प्रयोगशालाओं में हीरे बनाने का विकल्प तलाश रहीं हैं। ऐसे में प्रयोगशालाओं में बनने वाला हीरा डायमंड इंडस्ट्री में एक बहुत बड़ी क्रांति लेकर आ सकता है। इसके चलते भविष्य में होने वाली पर्यावरणीय क्षति से बचा जा सकता है।