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ग्लोबल वार्मिंग: हजारों सालों से ग्लेशियर में दफन हैं ये वायरस, निकले तो आएगी कोरोना से भी भयंकर महामारी

Fri, 30 Apr 2021 09:41 AM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण पृथ्वी का तापमान गर्म हो रहा है। ग्रीन हाउस गैसों में निरंतर वृद्धि के चलते धरती का औसतन तापमान बढ़ने लगा है। इस कारण ध्रुवों पर जमे ग्लेशियर पिघल रहें हैं। इससे पृथ्वी का जल चक्र प्रभावित हो रहा है, जिसके वजह से एक बड़ा खतरा उभर सकता है। बता दें कि ग्लेशियर के भीतर बड़ी मात्रा में अज्ञात वायरस छिपे हुए हैं, जो पिघलने के चलते दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ANI
हाल ही में अमेरिका के वैज्ञानिकों का एक समूह तिब्बत में ग्लेशियर के भीतर दफन वायरसों पर शोध करने के लिए गया। उन्होंने वहां से सैंपल एकत्रित किए और रिसर्च में पाया कि जिस ग्लेशियर का उन्होंने सैंपल लिया था, उसमें 28 प्रकार के जिंदा वायरस थे, जो कि 15 हजार सालों से बर्फ के अंदर दफन थे। वैज्ञानिकों ने इस अनुसंधान के बाद बताया कि ये बहुत ही खतरनाक वायरस हैं। ये अलग-अलग तरह की जलवायु में भी जीवित रहने में सक्षम हैं। ऐसे में कल को अगर ये सक्रिय होते हैं, तो परिणाम काफी भयंकर होंगे। इनके वजह से लाखों लोगों की जान जा सकती हैं। हम इनसे लड़ने के लिए अभी तैयार नहीं हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि आज अंटार्कटिका का ग्लेशियर पहले के मुकाबले काफी तेजी से पिघल रहा है। इसके ग्लेशियर में न जाने कितने वायरस छिपे हुए हैं, जो आने वाले समय में पृथ्वी पर एक भयंकर महामारी ला सकते हैं। ये महामारी आज के कोरोना महामारी से भी ज्यादा खतरनाक होगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
हाल ही में कुछ महीनों पहले उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर पिघलने की खबर सामने आई थी। भारत के इस इलाके में काफी ज्यादा ग्लेशियर हैं। पर्यावरणविदों की माने तो निरंतर बढ़ते तापमान से इनके पिघलने की रफ्तार पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है। ऐसे में ग्लेशियर के भीतर दफन वायरस बर्फ पिघलने की वजह से नदी में मिल सकते हैं। इस कारण इन वायरसों का नदी के सहारे पूरे भारत भर में फैलने की संभावना है, जिसके कारण आशंका जताई जा रही है कि एक गंभीर महामारी भारत में जन्म ले सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस समय पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। महामारी क्या होती है? ये अब हमें पता चल रहा है। इसके गंभीर परिणाम क्या हैं? ये आज हमारी आंखों के सामने दिख रहें हैं। विश्व भर में रोजाना हजारों जानें जा रहीं हैं। करोड़ों लोग अपनी नौकरियों से हाथ धो बैठे हैं। इंसान सीमित हो गया है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
ऐसे मे ग्लोबल वार्मिंग रूपी दूसरा खतरा मुंह खोले हमारे सामने खड़ा है। पृथ्वी का वैश्विक तापमान निरंतर बढ़ रहा है। अगर ये ऐसे ही बढ़ता रहा, तो दुनिया के कई बड़ी जगहें जलमग्न हो जाएंगी। कार्बन डाइऑक्साइड के कारण जल चक्र पूरी तरह बिगड़ जाएगा। इसका एक बहुत बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र में भी देखने को मिलेगा। कई फसलों को नुकसान पहुंचेगा और भयंकर भुखमरी भी आ सकती है। 
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