एक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कैफे में काम कर रहे 12 लोगों में से 11 लोग लोकोमोटर दिव्यांग हैं। इसका मतलब यह है कि वह चल-फिर नहीं सकते हैं। वहीं एक सदस्य सुन नहीं सकता है। इस कैफे का नाम 'कैफे एबल' रखा गया है, जिसकी प्रतिदिन कमाई करीब दस हजार रुपये है। इस कैफे में हेड शेफ से लेकर जूस मास्टर, टी मास्टर, बिलिंग क्लर्क और सफाईकर्मी सहित सभी दिव्यांग हैं। जिलाधिकारी संदीप नंदूरी का कहना है कि मुझे अक्सर अलग-अलग दिव्यांग जनों से नौकरियों के लिए याचिकाएं मिलती थीं, लेकिन हर किसी को नौकरी देना संभव नहीं था। इस कारण कैफे खोलने का विचार आया।