सांकेतिक तस्वीर
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अब बतौर संतान उसके मां-बाप के पास सिर्फ एक बेटी है, जो बार-बार अपने भाई के बारे में पूछ रही है। लेकिन, घर वाले उसे जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
सत्यम के पिता किसी से बात नहीं कर पा रहे हैं। वे सदमें में हैं। वे और उनके अधिकतर रिश्तेदारों की चितरपुर बाजार में बर्तनों की दुकान है। उसके दादा गंगा प्रसाद ने बीबीसी को बताया कि सत्यम की तबीयत थोड़ी खराब थी। वह घर से अपने पापा की दुकान पर आया, ताकि उसके पापा और चाचा घर जाकर खाना खा सकें। ऐसा हुआ भी। जब वे लोग खाना खाकर दुकान वापस लौट आए, तो सत्यम को खाने के लिए घर भेजा। लेकिन, वह घर जाने के बजाए अपने दोस्तों के साथ मायल स्टेशन चला गया और यह हादसा हो गया।
उन्होंने कहा, "हमें लगा कि वह घर गया है। चितरपुर में संडे बाजार लगा था, इसलिए भीड़ थी। तभी कुछ लोग हमारे पास आए और बताया कि एक लड़का स्टेशन पर जिंदा जल गया है। लोग उसे देखने जा रहे थे। हमलोग तब बैठे रहे, क्योंकि दुकान खुली थी। फिर कुछ और लोग आए और यही बात कही, तब हमलोग स्टेशन गए। वहां सत्यम की लाश पड़ी थी। पुलिस वालों ने उसे तौलिए से ढक दिया था। हमारे ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया है। क्या पता हमें किस गलती की सजा मिली है।"