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भारत में एक ऐसी जगह जहां रात में जाने पर जिंदा वापस कोई नहीं आता है

Thu, 12 Sep 2019 12:45 PM IST
प्रशांत राय फीचर डेस्क, अमर उजाला
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धनुषकोडी - फोटो : pixabay
हमारे देश में कई ऐसी सारी जगहें हैं, जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। ऐसी ही एक जगह है धनुषकोडी। धनुषकोडी भारत के तमिलनाडु के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के किनारे पर स्थित है। इसे भारत का अंतिम छोर भी कहा जाता है। ये वो जगह है, जहां से श्रीलंका दिखाई देता है। ऐसा नहीं है कि ये जगह पहले सी वीरान थी। एक समय यहां ढेर सारे लोग रहते थे। लेकि अब ये जगह वीरान हो गई है। धनुषकोडी भारत और श्रीलंका के बीच स्थित है। जो दोनों देशों के बीच एकमात्र ऐसी स्थलीय सीमा है जो पाक जलसंधि में बालू के टीले पर मौजूद है, जिसकी लंबाई केवल 50 गज है। इसी कारण से इस जगह को विश्व लघुतम स्थानों में से एक माना जाता है। 
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धनुषकोडी - फोटो : social media
इस खास जगह पर दिन के वक्त लोग खूब घूमने आते हैं। लेकिन रात होने से पहले ही सभी लोगों को वापस भेज दिया जाता है। क्योंकि यहां रात के वक्त घूमना बिल्कुल मना है। लोग शाम होने से पहले रामेश्वरम लौट जाते हैं। आपको बता दें कि धनुषकोडी से रामेश्वरम का रास्ता 15 किलोमीटर लंबा है और बेहद सुनसान है। यहां किसी को भी डर लग सकता है। क्योंकि इस इलाके को बेहद रहस्यमयी माना जाता है। कई लोग तो इस जगह को भूतहा भी मानते हैं। 
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धनुषकोडी - फोटो : Social media
आपको बता दें कि साल 1964 में आए खतरनाक चक्रवात से पहले धनुषकोडी भारत का एक बेहतरीन पर्यटन स्थल था। उस दौरान धनुषकोडी में रेलवे स्टेशन, अस्पताल, चर्च, होटल और पोस्ट ऑफिस बना हुआ था। लेकिन साल 1964 में आए चक्रवात ने सबकुछ खत्म कर दिया। कहा जाता है कि इस दौरान सौ से अधिक यात्रियों वाली एक रेलगाड़ी समुद्र में डूब गई थी। तब से यह जगह सुनसान हो गई। 

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धनुषकोडी - फोटो : pixabay
ऐसा कहा जाता है कि धनुषकोडी वो जगह है, जहां से समुद्र के ऊपर रामसेतु का निर्माण शुरू किया था। कहा जाता है कि इसी जगह पर भगवान श्रीराम ने हनुमान को एक पुल का निर्माम करने का आदेश दिया था, जिसपर से होकर वानर सेना लंका में प्रवेश कर सके। धनुषकोडी में भगवान राम से जुड़े कई मंदिर आज भी हैं। 
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धनुषकोडी - फोटो : Social media
ऐसा कहा जाता है कि विभीषण के निवेदन करने पर भगवान राम ने अपने धनुष के एक सिरे से सेतु को तोड़ दिया था। इस कारण से इसका नाम धनुषकोटि पड़ गया। कमिल में कोटि का मतलब सिरा होता है। इसलिए इसे धनुषकोडी नाम दिया गया है। 
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