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जब 41 साल बाद इस बिजनेसमैन ने खोज निकाली अपनी मां, भावुक कर देंगे हालात

Tue, 26 Nov 2019 10:11 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेविड नील्सन 41 साल बाद अपनी सगी मां के साथ - फोटो : toi
दुनिया में सबसे ज्यादा किसी रिश्ते को सम्मान दिया जाता है वो मां के रिश्ते को ही दिया जाता है। आप इस धरती पर ऐशो-आराम की ही जिंदगी क्यों न बिता रहे हो लेकिन मां की कमी किसी अन्य चीजों से पूरी नहीं की जा सकती है। कुछ ऐसा ही इस शख्स के साथ हुआ। यह शख्स अपनी मां को खोजते-खोजते सात समंदर पार आ गया।
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डेविड नील्सन - फोटो : toi
दरअसल, डेनमार्क के रहने वाले डेविड नील्सन 41 साल बाद अपनी सगी मां से मिलने भारत पहुंचे। डेविड अपनी मां को पिछले छह सालों से खोज रहे थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनकी मां फिलहाल मनाली में हैं। इस बात का पता चलते ही वो अपनी मां से मिलने मनाली पहुंच गए। इतने सालों बाद अपने बेटे से मिल डेविड की मां बस 'मेरा बेटा, मेरा बेटा' पुकारती रही।
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डेविड नील्सन - फोटो : toi
टाइम्स ऑफ इंडिया के खबर के मुताबिक डेविड अपनी मां के साथ तमिलनडु के पल्लावरम के एक चाइल्ड होम में रहते थे। चाइल्ड होम ने बिना किसी सुचना के डेविड को गोद दिए जाने वाले बच्चों की सूची में शामिल कर लिया। जब डेविड की उम्र महज दो साल थी तभी डेनमार्क के एक दंपति ने डेविड को गोद ले लिया। सबसे खास बात ये रही कि इस बात की जानकारी डेविड की मां को भी नही हुई।

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डेविड नील्सन - फोटो : toi
डेविड की उम्र 43 साल है और वो डेनमार्क में ही बॉन्ड ट्रेडर हैं। बता दें, एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर की मदद से डेविड ने अपनी मां को खोज निकाला। डेविड के दोस्तों और वकीलों ने भी उनकी मां को खोजने में भरपुर सहयोग दिया। अपनी मां से मिल डेविड ने कहा कि यह मेरे लिए बहुत ही भावनात्मक पल है।
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डेविड नील्सन - फोटो : toi
चेन्नई कॉर्पोरेशन के रिकॉर्ड के मुताबिक डेविड का जन्म 3 अगस्त 1976 को हुआ था और उनके माता पिता का नाम धनलक्ष्मी और कालियामूर्ती है। डेविड की मां धनलक्ष्मी मनाली में लोगों के घरों में काम करती हैं और वह अपने सबसे छोटे बेटे सरवनन के साथ रहती हैं। डेविड के माता-पिता बहुत गरीब थे इसलिए उन्होंने अपने 2 बेटों को पल्लवरम के चाइल्ड होम में दे दिया और वह खुद भी वहीं रहने लगी थी।
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डेविड नील्सन 41 साल बाद अपनी सगी मां के साथ - फोटो : toi
एक दिन वहां के प्रशासन ने धनलक्ष्मी को चाइल्ड होम छोड़ने के लिए कहा और वह जाने से पहले अपने बच्चों को लेने गईं तो उन्हें बताया गया कि उनके बच्चों को गोद ले लिया गया है। लेकिन धनलक्ष्मी को प्रशासन ने इस बात का भरोसा दिलाया था कि डेनमार्क में उनके बच्चों को अच्छी जिंदगी मिलेगी। अपनी मां को खोजने के बाद डेविड को अपने बड़े भाई रंजन के बारे में पता चला। रंजन को भी डेनमार्क के एक परिवार ने गोद लिया था और अब उसका नाम मार्टिन मैनुअल रासमुसेन है।
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