फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना वायरस पर चीनी डॅाक्टरों ने दुनिया से कहा था झूठ, स्टिंग ऑपरेशन में हुआ खुलासा

Thu, 21 Jan 2021 04:12 PM IST
योगेश जोशी फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस की शुरुआत से ही चीन पर गंभीर आरोप लगते आए हैं। वहीं चीन इस मामले में लगातार कहता आया है कि उसने दुनिया को कोरोना वायरस को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। हालांकि हाल ही में एक नई डॅाक्यूमेंट्री में काफी ऐसी जानकारियां सामने आईं हैं, जिससे ये साफ होता है कि कोरोना वायरस को लेकर चीनी डॅाक्टरों ने दुनिया से झूठ बोला था।
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
आईटीवी की डॉक्यूमेंट्री Outbreak: Virus that shook the world में वुहान के कुछ डॅाक्टरों को देखा जा सकता है। स्टिंग ऑपरेशन से ये साफ पता चल रहा है कि चीन के इन डॅाक्टरों को ये पता था कि ये वायरस कितना खतरनाक हो सकता है। इन डॅाक्टरों को झूठ बोलने के लिए कहा गया था। इस डॅाक्यूमेंट्री के एक हिस्से में एक डॅाक्टर ये कहता है कि दिसंबर 2019 के अंत में उसका एक रिश्तेदार कोरोना वायरस की वजह से मर गया है।
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
चीनी डॅाक्टरों को पता था कि वायरस इंसानों से इंसानों में फैल सकता है
  • चीन के इन डॅाक्टरों को इस बात की जानकारी थी कि ये वायरस इंसानों से इंसानों में फैल सकता है। एक डॅाक्टर के बयान के मुताबिक, डॅाक्टरों को इस बारे में कोई भी बात करने से मना किया गया था। कुछ डॅाक्टर चाहते थे कि इस वायरस के चलते लोगों को सचेत करना चाहिए, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया।

4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चीन ने 12 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन से कहा था कि इस वायरस के इंसानों से इंसानों में फैलने के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। गौरतलब है कि 21 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार कोरोना वायरस को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की थी। उस समय तक चीन के अलावा तीन अन्य देशों में ये वायरस फैल चुका था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम वुहान में
  • आपको बता दें कोरोना वायरस को लेकर जांच के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम वुहान में ही है। ताइवान के सीनियर वायरोलॅाजिस्ट डॅाक्टर यी- चुन ने कहा है कि इस वायरस को लेकर शुरुआत में चीनी मैनेजमेंट पूरी तरह से असफल साबित हुआ था। चीन अगर पारदर्शिता के साथ शुरुआती दौर में ही सही जानकारियां देता तो इस महामारी को रोका जा सकता था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें