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वैज्ञानिकों की चेतावनी: दुनिया के कुछ हिस्सों में पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, कहीं छा सकता है अंधेरा

Mon, 15 Jun 2026 12:26 PM IST
Dharmendra Kumar Singh फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Sunlight On Earth: हाल ही में एक अध्ययन सामने आया है, जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। इस अध्ययन के मुताबिक, आने वाले वर्षों में पृथ्वी के कुछ इलाकों में सूरज की रोशनी कम पहुंचेगी, तो कहीं पर ज्यादा। 
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वैज्ञानिकों की चेतावनी: दुनिया के कुछ हिस्सों में पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, कहीं छा सकता है अंधेरा - फोटो : AI
Sunlight On Earth: पृथ्वी पर जीवन का आधार सूरज की रोशनी है। पेड़-पौधों की वृद्धि से लेकर मौसम का संतुलन, जल चक्र और सोलर पावर तक सीधे तौर पर सूरज पर निर्भर है। वैज्ञानिकों ने बेहद चौंकाने बदलाव का पता लगाया है, जो भविष्य में दुनिया के कई हिस्सों के लिए चुनौती साबित हो सकता है। हाल ही में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है, जिसमें संकते मिला है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने वाले सूर्य का प्रकाश का वितरण बदल रहा है। इस प्रभाव आने वाले समय में दुनिया के कई इलाकों पर पड़ सकता है। 

यह चिंता बढ़ाने वाला अध्ययन नेशनल रिव्यू जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस शोध में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण में होने वाले बदलाव से सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने का तरीका प्रभावित हो रहा है। चीन की ओशन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसका बदलाव का अध्ययन  अत्याधुनिक क्लाइमेट मॉडल और कंप्यूटर सिमुलेशन से किया है। अध्ययन के परिणामों से खुलासा हुआ है कि पृथ्वी के कुछ इलाकों में धूप की मात्रा में बढ़ोत्तरी हो सकती है, तो वहीं कुछ इलाकों में यह कम हो सकती है। 
 
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वैज्ञानिकों की चेतावनी: दुनिया के कुछ हिस्सों में पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, कहीं छा सकता है अंधेरा - फोटो : Adobe Stock
इन इलाकों में घट सकती है धूप

अध्ययन के मुताबिक आर्कटिक और अंटार्कटिका जैसे ध्रुवीय क्षेत्रों में आने वाले समय में पृथ्वी तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा कम हो सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि दुनिया में बढ़ रहे तापमान की वजह से जलवाष्प की मात्रा बढ़ती जा रही है और बादलों की संरचना में भी बदलाव हो रहा है। घने और चमकदार बादल सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी पर पहुंचने से पहले वापस अंतरिक्ष की तरफ परावर्तित कर देते हैं। इसके कारण ध्रुवीय इलाकों में पृथ्वी तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा घट सकती है। अनुमान के मुताबिक, आर्कटिक इलाके में गर्मियों के समय सूर्य की रोशनी में करीब 15 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। 
 
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वैज्ञानिकों की चेतावनी: दुनिया के कुछ हिस्सों में पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, कहीं छा सकता है अंधेरा - फोटो : Adobe Stock
भारत समेत कई क्षेत्रों में बढ़ सकती है धूप

एक तरफ ध्रुवीय क्षेत्रों में सूरज की रोशनी कम होने की संभावना है, जबति भारत, अमेरिका और यूरोप के मध्य अक्षांश वाले इलाकों में इसका विपरित असर देखने को मिल सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन क्षेत्रों में बादल कम हो सकते हैं, जिसके कारण सूर्य की किरणें ज्यादा आसानी से पृथ्वी तक पहुंचेंगी। इसके परिणाम स्वरूप यह हो सकता है कि गर्मी के दिनों में धूप ज्यादा तेज हो सकती है और तापमान बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों में हीटवेव पहले ही गंभीर चुनौती बनकर सामने आ सकती है। इस बदलाव से गर्मी की तीव्रता बढ़ सकती है।

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वैज्ञानिकों की चेतावनी: दुनिया के कुछ हिस्सों में पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, कहीं छा सकता है अंधेरा - फोटो : Freepik
क्यों सूर्य की रोशनी के संतुलन में हो रहा है बदलाव? 

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।  ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वातावरण ज्यादा नमी धारण कर रहा है। जलवाष्प सूरज की कुछ ऊर्जा को अवशोषित कर लेती है। यह रोशनी की मात्रा को प्रभावित करता है। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में  बादलों के बनने और फैलने का पैटर्न बदल रहा है। कुछ इलाकों में बादल बढ़ रहे हैं, तो कुछ क्षेत्रों में कम हो रहे हैं। इसके कारण कहीं धूप कम, तो कुछ स्थानों पर ज्यादा धूप पहुंच रही है। वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को डाउनवर्ड सरफेस सोलर रेडिएशन के तौर पर परिभाषित करते हैं यानी वह सौर ऊर्जा जो वातावरण को पार कर पृथ्वी की सतह तक आती है।

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वैज्ञानिकों की चेतावनी: दुनिया के कुछ हिस्सों में पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, कहीं छा सकता है अंधेरा - फोटो : Freepik
ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने के साथ ही बदलाव और स्पष्ट होगा

शोधकर्ताओं के कहा है कि यह सिर्फ भविष्य की आशंका नहीं है। हाल के वर्षों में मिले सैटेलाइट आंकड़ों में भी इस तरह के संकेत मिले हैं कि पृथ्वी पर पहुंचने वाली सूर्य की ऊर्जा में बदलाव हो रहा है। अध्ययन में विभिन्न स्तरों के कार्बन उत्सर्जन वाले परिदृश्यों के विश्लेषण और लगभग सभी स्थितियों से यह निष्कर्ष निकला कि जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी, वैसे-वैसे यह बदलाव और साफ होता जाएगा।

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क्या है पृथ्वी के भविष्य? 

विशेषज्ञ मानते हैं कि सूर्य की रोशनी के वितरण में हो रहा है बदलाव सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, पारिस्थितिकी तंत्र और वैश्विक जलवायु चक्र पर भी पड़ने की संभावना है। वैज्ञानिकों की कोशिश है कि इन निष्कर्षों के आधार पर अधिक सटीक जलवायु मॉडल विकसित जाए, ताकि भविष्य में कौन से इलाके ज्यादा प्रभावित होंगे इसे समझा जा सके। इस अध्ययन से संकेत मिलता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा जटिल और व्यापक हो सकते हैं, जिनके लिए दुनिया को समय रहते तैयार हो जाना चाहिए। 
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