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भारत-चीन सीमा विवाद और कोरोना महामारी के बीच फंसे एक चीनी नागरिक की कहानी

Fri, 17 Jul 2020 07:43 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत-चीन सीमा विवाद - फोटो : Istock
हाईगो मा पेशे से इंजीनियर हैं और चीन के शिजुआन प्रांत से हैं। उन्होंने भारतीय मूल की पल्लवी से शादी की है, जो चीनी भाषा की एंटरप्रिटर हैं। दिसंबर 2016 में दोनों की शादी हुई थी। दोनों की ढाई साल की बेटी है जिसका नाम है आंची। हाईगो कहते हैं, "जब वुहान में कोरोना वायरस कहर बरपा रहा था तब पूरे चीन में एक तरह का डर फैल गया था। हर कोई लगातार एक अनजाने डर में जी रहा था।"

"पल्लवी और उनके पिता को मेरे स्वास्थ्य और सुरक्षा के बारे में चिंता थी। वो चाहते थे कि मैं भारत आकर अपने परिवार के साथ रहूं। उस वक्त भारत में कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया था। मेरे पास भारतीय वीजा था और मैंने सोचा कि बेहतर होगा कि मैं अपने परिवार के पास रहूं। फिर जनवरी के आखिरी सप्ताह में मैं अहमदाबाद आ गया।"
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हाईगो मा और पल्लवी - फोटो : बीबीसी
एक तरफ कोरोना तो दूसरी तरफ सीमा विवाद
भारत आने के बाद हाईगो के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अहमदाबाद में चीनी खाना तलाशना। वो कहते हैं, "मुझे लगा कि मैं जल्द ही वेजिटेरियन बन जाऊंगा। यहां पारंपरिक नॉन-वेजिटेरियन चीनी खाना नहीं मिलता था। जैसे-जैसे कोरोना महामारी का डर बढ़ता गया यहां नॉन-वेजिटेरियन खाने के विकल्प भी कम होते गए। मैं अधिकतर अंडे खाने लगा था।"

हाईगो को गुजराती खाने की आदत नहीं थी। वो कहते हैं कि उन्हें रोटी पसंद है, लेकिन वो इसे अपनी स्टेपल डाइट के तौर पर स्वाकीर नहीं कर पाते।
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भारत चीन सीमा विवाद - फोटो : iStock
पल्लवी कहती हैं, "इससे पहले जब हाईगो अहमदाबाद आते तो अपना खाना अक्सर खुद ही बनाया करते थे। मैं वेजिटेरियन हूं और चीन जाती हूं, तो अक्सर फलों और सब्जियों पर ही निर्भर रहती हूं।" कोरोना महामारी के साथ-साथ हाल में दिनों में भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के कारण परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं।

हाईगो कहते हैं, "मैं सोच रहा था कि इस बार यहां आने के बाद मैं अपनी पत्नी और बेटी के परमानेन्ट वीजा के लिए सारी जरूरी औपचारिकता पूरी कर लूंगा। मैं अपने परिवार के साथ हमेशा के लिए चीन जाना चाहता था।"

पल्लवी कहती हैं, "भारत-चीन के बीच जारी सीमा विवाद के कारण मेरे चीनी वीजा का काम रुक गया है। मैंने डिपेन्डेंट वीजा के लिए आवेदन किया है। मुझे नहीं पता कि मैं और मेरी बेटी कब चीन जा पाएंगे।"

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chinese apps banned in india - फोटो : ग्राफिक्स- रोहित झा/अमर उजाला
हाईगो के बारे में पल्लवी बताती हैं, "वो अक्सर रोजमर्रा की छोटी-मोटी चीजों के लिए घर से बाहर चले जाया करते थे। उन्हें केवल चीनी भाषा आती है। वो अंग्रेजी या फिर कोई और भाषा नहीं जानते। लेकिन इसके बावजूद वो आसानी से सामान खरीद लाया करते थे। लेकिन गलवान घाटी में हुई घटना के बाद से वो घर पर ही हैं। हम जिस सोसायटी में रहते हैं, वहां किसी को इस बात से कोई एतराज नहीं कि हाईगो चीनी नागरिक हैं। लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए वो घर पर ही रहना पसंद कर रहे हैं।"

हाल में भारत-चीन सीमा विवाद गहराने के बाद भारत सरकार ने 59 चीनी मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद हाईगो और पल्लवी को चीन में रह रहे हाईगो के परिवार के साथ संपर्क कर पाने में मुश्किलें पेश आ रही हैं। पल्लवी कहती हैं, "हम वीचैट के जरिए चीन में रह रहे हाईगो के माता-पिता से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। बैन लगने से पहले हम चैट पर और वीडियो कॉल के जरिए दिन में कम से कम चार बार तो उनसे बात कर ही लेते थे। लेकिन अब ऐसा करना भी मुश्किल हो गया है।"
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हाईगो मा और पल्लवी - फोटो : बीबीसी
कैसे और कहां मिले पल्लवी और हाईगो
पल्लवी बताती हैं कि उनके परिवार में लोग बौद्ध धर्म में आस्था रखते हैं। वो कहती हैं, "मैं हमेशा से चीनी परंपरा, संस्कृति और लोगों के बारे में जानना चाहती थी। मैंने चीनी भाषा सीखने का फैसला किया। बिहार के बोधगया से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने चीनी भाषा सीखी और एंटरप्रिटर के तौर पर काम करने लगी। मैं भारत दौरे पर आने वाले चीनी बिजनेसमैन की मदद करने लगी क्योंकि न तो वो हिंदी जानते थे और न ही अंग्रेजी।"

पल्लवी कहती हैं, "साल 2016 में मैं आंध्र प्रदेश के नेल्लूर में एक तकनीकी कंपनी में एंटरप्रिटर के तौर पर काम करने लगी। हाईगो ने वहां क्वालिटी इंजीनियर के तौर पर ज्वाइन किया था। दफ्तर में मेरी उनके साथ अलग-अलग मुद्दों पर बात होती थी। हाईगो के दोस्त नहीं थे। ऐसे में हम लोग साथ में खाने खाते और बातें करते। हम लोग अपनी पसंद-नापसंद और अपने शौक के बारे में बातें करते। फिर एक दिन हाईगो ने मुझसे पूछा कि मुझे कैसा जीवनसाथी चाहिए।"
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हाईगो मा और पल्लवी - फोटो : बीबीसी
पल्लवी कहती हैं, "मैंने हाईगो को कहा मैं उससे शादी करना चाहूंगी, जो मुझे समझता हो।" इसके बाद हाईगो ने पल्लवी को बताया कि उन्हें भारतीय संस्कृति पसंद है और वो बौद्ध धर्म को मानने वाली किसी भारतीय लड़की से शादी करना चाहते हैं।

कई महीनों तक हम एक दूसरे से मुलाकातें करते रहे। हाईगो ने अपने परिवार के वीचैट ग्रुप पर पल्लवी को जोड़ा, जहां वो उनके परिवार के साथ घुलमिल गईं। इसके बाद पल्लवी ने अहमदाबाद में अपने परिवार की मुलाकात हाईगो से करवाई। हाईगो को भी परिवार में सभी ने पसंद किया, जिसके बाद दोनों मे शादी करने का फैसला किया। अपने-अपने परिवार में हमने शादी के बारे में बात की तो किसी ने कोई विरोध नहीं किया। 2016 में हमने शादी कर ली।
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चीनी नववर्ष - फोटो : बीबीसी
हाईगो बताते हैं, "पल्लवी चाहती थी कि उसकी शादी भारतीय रीति रिवाजों से हो। इसलिए हमने अहमदाबाद में शादी की और मेरा परिवार इसके लिए चीन से यहां आया। इसके बाद हमने शिजुआन में रिसेप्शन की पार्टी दी।"

हाईगो कहते हैं कि उन्हें काम के सिलसिले में चीन लौटना था। अलग-अलग देशों में जाकर कुछ वक्त वहां रह कर काम करना, उनके काम का हिस्सा है। ऐसे में दोनों ने फैसला किया कि पल्लवी अहमदाबाद में ही रहेंगी, जबकि हाईगो बीच-बीच में यहां आते रहेंगे। मैं भारत आता रहता था। 2017 में हमारी बेटी हुई। हमने उसका नाम आंची रखा। चीनी भाषा में आंची का मतलब होता है शांति।

हाईगो के परिवार के साथ चीनी नववर्ष मनाने के लिए साल 2018 में पल्लवी और आंची चीन गए थे। वे कहते हैं, "कभी मैं भारत आ जाता तो कभी पल्लवी और आंची चीन आ जाते। हमारी जिंदगी अच्छी थी, लेकिन फिर 2019 में कोरोना वायरस के कारण चीजें बदल गईं। लेकिन इसमें एक अच्छी बात ये है कि मैंने अपनी बेटी आंची के साथ लंबा वक्त बिताया है। लेकिन मुझे ये बात परेशान कर रही है कि मैं कब चीन में अपने घर जा पाऊंगा।"
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