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150 साल पहले पेश हुआ था भारत का पहला बजट, लेकिन 200 करोड़ रुपये का हो गया था घाटा, जानिए क्यों

Fri, 01 Feb 2019 02:13 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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budget history
भारत में बजट का इतिहास 150 साल से भी ज्यादा पुराना है। प्रतिवर्ष खासकर सरकारी आय और व्यय का लेखाजोखा तय होना और फिर उसके अनुसार ही आर्थिक गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है।    
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budget 2019 - फोटो : PTI
ब्रिटिश भारत का पहला बजट 18 फरवरी, 1869 को जेम्स विल्सन ने पेश किया था। विल्सन उस वक्त इंडिया काउंसिल के सदस्य (वित्त) थे। जेम्स विल्सन का प्रमुख काम वित्तीय मामलों में वायसराय को सलाह देना था। विल्सन स्कॉटलैंड के जानेमाने व्यवसायी, अर्थशास्त्री और उदारवादी धड़े के राजनेता थे। 
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भारत में सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने ब्रिटिश क्राउन के लिए 7 अप्रैल, 1860 को बजट पेश किया था। विल्सन प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द इकोनोमिस्ट’ और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के संस्थापक भी थे। आजाद भारत का पहला बजट आरके. षणमुखम शेट्टी ने आजादी के बाद 1947 में पेश किया था। संयुक्त भारत के पहले बजट में 204.59 करोड़ रुपए का वित्तीय घाटा दिखाया गया था, जबकि कुल राजस्व का आकलन महज 171.15 रुपए ही था।

पहले शाम को पेश किया जाता था बजट

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- फोटो : Social Media
भारत में पेश किए जाने वाले बजट में काफी हद तक ब्रिटिश प्रक्रिया का पालन किया जाता है। यहां तक कि बजट पेश करने का समय भी ब्रिटिश बजट के अनुसार ही रखा गया था। अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में उस वक्त के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने वर्ष 1999 में दशकों से चली आ रही परंपरा को तोड़ा और बजट को शाम 5:30 के बजाय सुबह तकरीबन 11 बजे से पेश करने की घोषणा की थी।
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- फोटो : PTI
बता दें कि ब्रिटेन में भी दोपहर को ही बजट पेश किया जाता है, लेकिन भारत का समय ब्रिटेन से साढ़े पांच घंटा आगे होने के कारण ब्रिटिश भारत में बजट शाम को पेश किया जाता था। आजादी के बाद भी इसे जारी रखा गया था।
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- फोटो : PTI
दो हिस्सों में पेश किया जाता है आम बजट: आम बजट को आमतौर पर दो हिस्सों में पेश किया जाता है। पहले भाग में सामान्य आर्थिक पहलुओं को शामिल किया जाता है। इसमें विभिन्न परियोजनाओं के संचालन या नए प्रोजेक्ट्स आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है।
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बजट 2019
वहीं, दूसरे हिस्से में कर प्रणाली को शामिल किया जाता है। इसके तहत मौजूदा कर ढांचे में बदलाव या कर में वृद्धि या कटौती के प्रावधान को शामिल किया जाता है।
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